उच्चत्तर शिक्षा विभाग के निदेशक अमरजीत कुमार शर्मा
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प्रदेश उच्चतर शिक्षा विभाग ने सूबे के सभी सरकारी महाविद्यालयों को एक निजी बैंक में खाते खोलने के लिखित में निर्देश जारी किए हैं। कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक और हिमाचल ग्रामीण बैंक समेत प्रदेश में आधा दर्जन से अधिक सहकारी बैंक और एक दर्जन राष्ट्रीय बैंक की शाखाएं चल रही हैं, लेकिन सरकारी क्षेत्र के बैंकों को छोड़ एक निजी विशेष बैंक में सरकारी महाविद्यालयों के खाते खोलने के लिखित निर्देश से प्रदेश में बवाल मच गया है। वर्तमान में सूबे में 131 महाविद्यालय और 7 संस्कृत महाविद्यालय सरकारी क्षेत्र में चल रहे हैं।
इन सभी महाविद्यालयों के खाते में निकटवर्ती क्षेत्र की बैंक शाखाओं में चल रहे हैं। विद्यार्थियों से दाखिला शुल्क, ट्यूशन, परीक्षा शुल्क समेत अन्य कई तरह के शुल्क वसूलने के बाद महाविद्यालय संबंधित बैंक शाखाओं में फंड जमा करवाते हैं। नए निर्देशों के बाद सरकारी बैंकों और सरकारी महाविद्यालयों के अधिकारी और कर्मचारी भी नाराज हैं।
लोगों का आरोप है कि इस तरह के निर्देश निजी बैंकों को सीधा फायदा पहुंचाने के लिए हैं, जिसका वह विरोध करते हैं। प्रदेश सरकार आए दिन विभिन्न मंचों पर विभिन्न सभी सरकारी विभागों को अपने बैंक खाते प्रदेश के सहकारी और राष्ट्रीय बैंक शाखाओं में खोलने के निर्देश देती नजर आ रही है। उच्चतर शिक्षा विभाग के अधिकारी इस पत्र में सरकार की घोषणाओं और दावों पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।
उधर, उच्चत्तर शिक्षा विभाग के निदेशक अमरजीत कुमार शर्मा ने कहा कि किसी भी सरकारी महाविद्यालय को निजी बैंक में खाता खुलवाने के निर्देश नहीं दिए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश सचिवालय ने सूबे के महाविद्यालयों को एक सुझाव दिया है। अगर किसी महाविद्यालय को पुराने बैंक से बेहतर सुविधाएं नहीं मिल रही हैं तो वह विकल्प में जा सकता है। चूंकि प्रदेश विवि शिमला में संबंधित निजी बैंक बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवा रहा है।