सड़क दुर्घटना में हो गई थी राजेंद्र की मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सत्र न्यायालय ने कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत एक सड़क दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति (पेशे से चालक) के आश्रितों को 6.90 लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने यह राशि मृतक की पत्नी, दो बच्चों और मां को समान रूप से बांटने के आदेश दिए हैं।
कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम के आयुक्त एकांश कपिल ने फैसला सुनाते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया कि वह 6,90,080 की राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दुर्घटना की तिथि से लेकर वसूली की तिथि तक भुगतान करें। अदालत ने माना कि यह हादसा रोजगार के दौरान हुआ इसलिए मृतक के आश्रितों को मुआवजा पाने का अधिकार है। दरअसल जिला हमीरपुर की तहसील घुमारवीं निवासी मृतक राजेंद्र पाल उर्फ राजिंदर शर्मा (44) की 7 जून 2015 को शनान कैंची के पास एक दुर्घटना में मौत हो गई थी। मृतक की पत्नी मंजू शर्मा ने अपने पति की आय पर निर्भरता जताते हुए दावा दायर किया था। उनका कहना था कि दुर्घटना के बाद प्रतिवादियों से मुआवजे की मांग करने पर भी कोई भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद अगस्त 2015 में उन्होंने अपने बच्चों आयुषी और प्रणय तथा मां सुखा देवी के साथ अदालत में याचिका दाखिल की।
अदालत ने सुनवाई में पाया कि मृतक को 9,000 मासिक वेतन मिलता था लेकिन अधिनियम के अनुसार गणना के लिए अधिकतम 8,000 मासिक वेतन मान्य होगा। अदालत ने कंपनी को आदेश दिया कि 6,90,080 की राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज की दर से 8 जुलाई 2015 से 31 अक्तूबर 2025 तक ब्याज सहित भुगतान किया जाए। अदालत ने कहा कि आश्रितों को 25 हजार मुआवजा सहित 5,000 की अंतिम संस्कार व्यय राशि पाने का भी अधिकार है।