संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। संजौली स्थित व्यावसायिक भवन के किराया विवाद मामले में अपीलीय प्राधिकारी ने एक अहम फैसला सुनाते हुए किरायेदार कुलजीत लाल को 59,73,120 रुपये का बकाया किराया चुकाने का आदेश दिया है।
साथ ही आदेश दिया है कि यह राशि 30 दिन के भीतर जमा नहीं की जाती है, तो किरायेदार को दो माह के भीतर दुकान खाली करनी होगी। यह आदेश जिला शिमला के अपीलीय प्राधिकारी दविंदर कुमार ने जारी किया। यह मामला वर्ष 2023 में श्रुति सूद बनाम कुलजीत लाल से जुड़ा है। याचिकाकर्ता श्रुति सूद ने आरोप लगाया था कि एक मार्च 2021 से जून 2023 तक किराया नियमित रूप से नहीं दिया गया और बकाया लगातार बढ़ता गया। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि दुकान को 9 साल की लीज पर लिया था। मार्च 2020 से किराया 1.60 लाख प्रति माह तय था जिसे मार्च 2023 से बढाकर 1.84 लाख कर दिया गया।
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ट्रायल कोर्ट ने पहले किरायेदार को 13,30,280 का बकायेदार माना था लेकिन अपील में श्रुति सूद ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने आगे का किराया, जीएसटी, टीडीएस और ब्याज शामिल नहीं किया है। अपीलीय प्राधिकरण ने सभी सबूतों और दस्तावेजों की जांच के बाद ट्रायल कोर्ट के आदेश में संशोधन कर कुल बकाया 59,73,120 निर्धारित की। कोर्ट ने कहा कि किरायेदार यह राशि 30 दिन के भीतर किराया नियंत्रक के समक्ष जमा कर देता है, तो उसे बेदखली से राहत मिल सकती है। अन्यथा दुकान खाली करनी होगी। यह मामला दो वर्षों से संजौली क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ था, जिसे इस फैसले के बाद एक बड़ा मोड़ मिल है।
किरायेदार ने कोविड-19 का दिया था हवाला
मामले के दौरान किरायेदार ने कोविड-19 अवधि में व्यापार प्रभावित होने का हवाला देते हुए किराये में रियायत का दावा किया था। लेकिन अदालत ने यह तर्क अस्वीकार कर दिया। अदालत ने कहा कि किरायेदार अपने दावे के समर्थन में कोई प्रमाण या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बकाया किराये की गणना केवल याचिका दायर होने की तारीख तक ही नहीं बल्कि निर्णय की तारीख तक की जानी चाहिए। फैसले के अनुसार मार्च 2021 से 30 जून 2025 तक कुल बकाया राशि 59,73,120 निर्धारित की है।