50 हजार रुपये मुकदमेबाजी खर्च के देने होंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। बंगलूरू की पीएनबी मेटलाइफ इंडिया इंश्योरेंस कंपनी (बीमाकर्ता) को करीब 10 साल बाद मृतक के परिजनों को बीमा का मुआवजा देना होगा। राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता ने ऊना आयोग के पारित फैसले को बरकरार रखते हुए बीमा कंपनी को मृतक के परिजनों को शिकायत की तिथि से वसूली तक नौ प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज सहित 2.85 लाख की राशि का भुगतान करने के आदेश दिए थे। साथ ही मुआवजा और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 50 हजार रुपये देने होंगे। आयोग ने माना कि मृतक रघुवीर सिंह बीमा कंपनी से दावा की गई राशि के हकदार थे और बीमा कंपनी की ओर से दावे का निपटान न करना सेवा में कमी के बराबर है।
यह मामला ऊना जिला उपभोक्ता आयोग का है। 7 जुलाई 2015 को शिकायतकर्ता रघुवीर सिंह (मृतक बीमित व्यक्ति) ने मेटलाइफ मेजर इलनेस प्रीमियम बैंक कवर प्लान के तहत कंपनी से 18,756 रुपये की प्रीमियम राशि का भुगतान करके पॉलिसी खरीदी थी। इसकी बीमित राशि 5 लाख रुपये थी। इसी बीच रघुवीर सिंह लकवाग्रस्त हमले के कारण बीमार पड़ गए। इस कारण 75 प्रतिशत स्थायी विकलांगता हो गई थी। उन्होंने बीमा कंपनी के समक्ष दावा प्रस्तुत किया गया लेकिन कंपनी ने इस आधार पर दावे को खारिज कर दिया था। इससे परेशान होकर उसने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की थी। राज्य उपभोक्ता आयोग ने 17 जनवरी 2024 को ऊना आयोग के पारित फैसले के विरुद्ध बीमा कंपनी की अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि ऊना जिला आयोग का पारित आदेश उचित है। इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। संवाद