कर्मचारियों को सस्ती दरों पर मुहैया करवाना होगा भोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। औद्योगिक न्यायाधिकरण-सह-श्रम न्यायालय शिमला ने सिक्योर मीटर लिमिटेड बद्दी और उसके कर्मचारियों के बीच चल रहे वर्षों पुराने औद्योगिक विवाद पर बड़ा फैसला सुनाया है।
पीठासीन न्यायाधीश अनुजा सूद ने यूनियन की मांगों पर सुनवाई करते हुए कंपनी प्रबंधन को कर्मचारियों के वेतन में सुधार करने और बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने दोनों पक्षों को आदेश दिया कि वह कंपनी के उप-नियमों और स्टैंडिंग ऑर्डर्स का पालन करें तथा सभी कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करें। मामला 5 जनवरी 2015 को यूनियन द्वारा दिए एक डिमांड नोटिस से शुरू हुआ था। इसमें कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं को लेकर प्रबंधन के सामने 35 सूत्री मांग पत्र रखा था।
यूनियन का आरोप था कि लगभग 18 वर्षों से श्रमिकों की सैलरी में नाममात्र की बढ़ोतरी हुई है, जो बढ़ती महंगाई के मुकाबले बहुत कम है। दूसरी ओर प्रबंधन ने यूनियन की सभी मांगों को सिरे से खारिज करते हुए इसे आधारहीन बताया था। प्रबंधन का कहना था कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा और आयात लागत के कारण वह अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाने में सक्षम नहीं हैं। कंपनी का दावा था कि वह पहले ही सरकारी मानकों से अधिक वेतन और बेहतर सुविधाएं दे रहे हैं। इसलिए अतिरिक्त महंगाई भत्ते की कोई कानूनी अनिवार्यता नहीं है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद कंपनी प्रबंधन को निर्देश दिए हैं कि प्रबंधन को अपने कर्मचारियों को सब्सिडी युक्त भोजन उपलब्ध कराने को कहा है जिसमें प्रबंधन का योगदान कर्मचारियों की तुलना में थोड़ा अधिक होगा।
कंपनी को दो फोन नंबर (मोबाइल या लैंडलाइन) उपलब्ध करवाने होंगे जिन्हें नोटिस बोर्ड पर चस्पा करना होगा। फैसले की तिथि से कंपनी को प्रत्येक कर्मचारी को 500 रुपये का मासिक परिवहन भत्ता देना होगा। कंपनी को कार्यस्थल पर साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल और महिलाओं तथा पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने फैक्ट्री एक्ट 1948 की धाराओं 53, 54, 57 और 59 के तहत श्रमिकों की मांगों को स्वीकार करते हुए प्रबंधन को इन नियमों का पूरी तरह से पालन करने के आदेश दिए हैं।
कंपनी को 2015 से देना होगा बकाया
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सिक्योर मीटर लिमिटेड के कर्मचारियों को वही वेतन वृद्धि, इंक्रीमेंट और भत्ते दिए जाएं जो कंपनी की ओर से अन्य समान पदों पर सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को दिए जा रहे हैं। यह लाभ एक अप्रैल 2015 से प्रभावी माना जाएगा। कंपनी को आदेश दिए हैं कि वह तीन महीने के भीतर कर्मचारियों को बकाया राशि का भुगतान करे। कर्मचारी प्रबंधन की नीतियों के अनुसार अच्छे कार्य और व्यवहार के दायरे में आते हैं, उन्हें अन्य सहकर्मियों के समान पदनाम दिए जाएं। भविष्य में यदि कर्मचारी मूल्यांकन फॉर्म नहीं भरते हैं तो उनका आकलन प्रबंधन की नीति के अनुसार उनके वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया जाएगा।