अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। एसएफआई की जिला कमेटी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और प्रदेश में सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने के प्रदेश सरकार के फैसले के विरोध में मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद शेरे ए पंजाब तक रैली निकाली।
जिला सह सचिव विवेक बीरसांटा ने कहा कि भारत में शिक्षा विशेषाधिकार नहीं, सांवैधानिक अधिकार है। केंद्र और प्रदेश सरकार आम मेहनतकश लोगों के बच्चों को शिक्षा मुहैया करवाने के लिए बने सरकारी स्कूलों और शिक्षा संस्थानों को बंद कर रही है। स्कूली शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा दे रही हैं। यह शिक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रहार है। सरकारी स्कूलों को बंद करना गरीब और आम बच्चों के भविष्य को बर्बाद करने की साजिश है। इससे निजी स्कूलों की मुनाफाखोरी बढ़ रही है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का भी विरोध किया और इसे शिक्षा का निजीकरण तथा व्यापारीकरण, सांप्रदायीकरण करार दिया। राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकारें लोकतांत्रिक तथा वैज्ञानिक आधार वाली शिक्षा को बढ़ावा देने की जगह इसे हटाकर निजीकरण और असमानता की ओर ले जा रही हैं। इससे शिक्षा महंगी होगी जिससे शिक्षा आम छात्रों की पहुंच से दूर हो जाएगी। पाठ्यक्रम में वैज्ञानिक और प्रगतिशील विषयों को हटाकर पाखंड और सांप्रदायिक सामग्री को जोड़ा जा रहा है।
ये उठाईं मांगें
एसएफआई ने एनईपी को रद्द करने और शिक्षा पर जीडीपी का 6 प्रतिशत खर्च करने की मांग को भी उठाया। इसके अलावा कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की संरचना को मजबूत करने, छात्रों से वसूली जा रही मनमानी फीस पर रोक लगाने, छात्रों को मुफ्त, समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने, शिक्षकों की नियमित नियुक्ति कर अनुबंध और आउटसोर्स नियुक्ति बंद करने का आग्रह किया। चेताया कि शिक्षा और छात्र विरोधी नीतियों के खिलाफ अभिभावकों, छात्रों को साथ लेकर आंदोलन लड़ा जाएगा।