संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के प्रमुख अस्पताल आईजीएमसी, डीडीयू, केएनएच और चमियाना में पार्किंग की समस्या मरीजों के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है। रोजाना इन अस्पतालों में दो हजार से अधिक मरीज उपचार के लिए आते हैं, लेकिन पार्किंग सीमित होने से मरीजों और उनके परिजनों को घंटों तक परेशानी झेलनी पड़ती है।
अस्पताल प्रबंधन की ओर से बनाई गई गिनी-चुनी पार्किंग में अधिकतर स्थान स्टाफ और डॉक्टरों की गाड़ियों से भरे रहते हैं। आम मरीजों के लिए कोई अलग पार्किंग सुविधा उपलब्ध नहीं है। मजबूरन लोगों को सड़क किनारे वाहन खड़े करने पड़ते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति भी पैदा होती है। आईजीएमसी की पार्किंग समस्या को लेकर कई बार हाईकोर्ट भी चिंता जता चुका है। फिलहाल स्थिति यह है कि मरीजों को गाड़ी अस्पताल के मुख्य गेट से दूर खड़ी करनी पड़ती है और बुजुर्ग तथा गंभीर रोगियों को स्ट्रेचर या व्हीलचेयर पर लंबी दूरी तय करनी पड़ती हैं। अस्पताल में सिक्योरिटी गार्ड और तीमारदारों में पार्किंग को लेकर कई बार विवाद भी हो चुका है। अस्पताल आने वाले लोगों का कहना है कि पार्किंग की कमी से उपचार में देरी होती है।
आईजीएमसी आए रमेश ने बताया कि सुबह सात बजे वह आईजीएमसी पहुंचे लेकिन आधा घंटा सिर्फ गाड़ी खड़ी करने में लग गया। मरीज गंभीर हालत में हो तो यह देरी जानलेवा साबित हो सकती है। चमियाना अस्पताल की स्थिति भी अलग नहीं है। वहां पहुंचने वाली सड़कों की चौड़ाई कम है और आसपास किसी प्रकार की पार्किंग सुविधा विकसित नहीं की गई है। यही हाल कमला नेहरू अस्पताल का है। जोनल अस्पताल डीडीयू के पास भी पार्किंग नहीं है।