विशाल के सकुशल टनल से निकलने के बाद भजन-कीर्तन करतीं महिलाएं।
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17 दिनों के बाद मौत के मुंह से निकले विशाल के घर में खबर सुनते ही उत्सव के जैसा माहौल बन गया। इस दौरान घर में दिवाली मनाई गई। खबर सुनते ही परिजनों की खुशी का ठिकाना न रहा। मां और दादी खुशी से झूम उठीं, अन्य रिश्तेदार और आस पास के लोग भी इस खुशी में शरीक होने के लिए पहुंच गए। इस दौरान नजारा देखने लायक रहा।
परिजनों ने जैसे ही विशाल को टनल से निकलते देखा तो उनकी जान में जान आ गई। दिनभर टीवी के आगे बैठकर बेटे के बाहर निकलने का इंतजार परिजन करते रहे। रात को जब बेटे के बाहर निकलने का पता चला तो पहले खूब भजन-कीर्तन का दौर चला। भगवान का शुक्रिया अदा करने के लिए परिजनों ने भेंटें गाकर आभार जताया।
मां यशोदा तेरा लाल लौट आया के गीत गाए जाने लगे। दादी और मां की आंखों से खुशी के आंसू भी झलक गए। पूरा घर रंग बिरंगी लाइटों से जगमगाने लग गया और डीजे की धुनों पर रिश्तेदारों ने झूमना शुरू कर दिया। नाटी भी डली। उधर, दिवाली के दिन ही विशाल टनल में फंस गया था, तो ऐसे में परिवार में यह त्योहार भी नहीं मना पाया था।
पटाखे और फुलझडियां भी यूं ही पड़े थे, मगर मंगलवार को जब टनल से निकलने का समाचार मिला तो परिवार ने दिवाली मनाई। इस दौरान सभी पटाखे और फुलझड़ियों को जलाया गया। परिजनों ने विशाल के सकुशल टनल से बाहर निकलने पर देर रात तक जश्न मनाया।
17 दिन बेटे विशाल से बात करने के लिए पिता धर्म सिंह और भाई योगेश टनल के बाहर डटे रहे। मंगलवार रात को विशाल जब टनल से बाहर निकला और पिता की नजरें बेटे पर पड़ी तो आंखों में आंसू आ गए। अफरातफरी के बीच बेटे से पिता धर्म सिंह बातचीत और उसे गले नहीं लगा पाए, लेकिन सुरक्षित देखकर तसल्ली मिल गई। पिता धर्म सिंह ने मोबाइल पर बातचीत में कहा कि बेटे को सुरक्षित देखकर दिल को सुकुन मिल गया है। हालांकि वह अभी तक बेटे से कोई बातचीत नहीं कर पाए हैं।
17 दिन और रातें बेटे के बाहर आने का इंतजार करते रहे। अब बेटे को एंबुलेंस के जरिये अस्पताल ले जाया जा रहा है। बेटा सुरक्षित है। इससे बढ़कर कोई और खुशी नहीं है। बेटे से मिलकर अब खैरियत ली जाएगी। फिलहाल कई तरह की टेंशन हैं, लेकिन बेटा सुरक्षित है यही बड़ी बात है। विशाल के बड़े भाई योगेश ने बताया कि लगातार 17 दिन इंतजार के बाद भाई सकुशल बाहर निकल आया है।
विशाल की एक झलक ने ही बड़ी राहत दी है। अब उसके घर साथ चलने का इंतजार है। उम्मीद है कि जल्द वह घर पहुंचेगा। जहां मां और दादी इंतजार कर रहे हैं। योगेश ने बताया कि पिता की 17 दिन में कई बार विशाल से वॉकी टॉकी पर बात हुई। हमेशा विशाल का सकारात्मक रवैया रहा और खुद को सुरक्षित और स्वस्थ बताया। अब विशाल को सुरक्षित देखकर बड़ी राहत मिली है।