शिमला। प्याज की कीमत 60 रुपये प्रति किलो पहुंचने के बाद राजधानी शिमला के लोगों ने खाने में प्याज का इस्तेमाल कम कर दिया है। 20 दिन के भीतर शहर में प्याज की डिमांड करीब 60 फीसदी घट गई है। 20 दिन पहले रोजाना करीब 250 कट्टे प्याज शिमला पहुंचता था लेकिन अब मुश्किल से सौ कट्टे प्याज की खपत हो रही है। बीस दिन में प्याज के दाम दोगुने बढ़े हैं। 30 से बढ़कर प्याज 60 रुपये प्रतिकिलो पहुंच गया है। हालांकि नवरात्रों में मांग घटने से प्याज की कीमतों में गिरावट आने की भी संभावना जताई जा रही है। 29 सितंबर से नवरात्र शुरू हो रहे हैं।
नवरात्र के दौरान बहुत से लोग खाने में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं करते जिसके चलते प्याज की मांग में गिरावट आने की संभावना है। उधर करीब 20 दिन बाद प्याज की नई फसल भी बाजार में पहुंचने वाली है। महाराष्ट्र के पिंपलगांव और लासलगांव में प्याज की फसल तैयार होने वाली है। नई फसल पहुंचने के बाद दामों में गिरावट आने की उम्मीद है।
ढाबों में मूली ने ली प्याज की जगह
प्याज के दाम बढ़ने के बाद शहर के होटलों, ढाबों और रेस्टोरेंट में खाने के साथ सलाद में प्याज की जगह मूली परोसी जा रही है। प्याज की चटनी की जगह ग्राहकों को इमली की चटनी दी जा रही है।
ढाई सौ से घट कर सौ कट्टे रह गई डिमांड
कृष्णा फ्रूट एंड वेजिटेबल एसोसिएशन लोअर बाजार सब्जी मंडी के अध्यक्ष सतपाल शर्मा (पिंटू) ने बताया कि 20 दिन पहले शहर में एक दिन में ढाई सौ कट्टे प्याज की डिमांड थी जो अब घटकर सौ कट्टे रह गई है। एक माह बाद नई फसल आने के बाद ही कीमतों में गिरावट आएगी।
ज्यादा बारिश से खराब हुई फसल
रूपामल सीता राम फर्म के संचालक और एसोसिएशन के उपाध्यक्ष संजीव सूद ने कहा कि मंडी में प्याज की डिमांड आधी रह गई है। महाराष्ट्र में ज्यादा बारिशों से फसल खराब होने के कारण प्याज की कीमतें बढ़ी हैं। फसल खराब होने से प्याज की क्वालिटी में भी फर्क पड़ा है।
बीस दिन में आएगी नई फसल
पंडित रवालदास जयसी राम फर्म के संचालक संजय शर्मा ने कहा कि करीब बीस दिन में नई फसल मार्केट में आने की संभावना है। ताजा माल बाजार में आने से प्याज की कीमतों में गिरावट आ सकती है। मौजूदा समय में प्याज का होलसेल रेट 40 से 50 रुपये किलो चल रहा है।