नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने नगर निगम धर्मशाला में कार्यरत कनिष्ठ अभियंता के छह मंजिला भवन निर्माण पर कड़ा संज्ञान लिया है। न्यायिक सदस्य अरुण कुमार त्यागी और सदस्य अफरोज अहमद ने इसकी जांच के लिए संयुक्त कमेटी का गठन किया है। शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव सहित प्रदेश के मुख्य वन अरण्यपाल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, डीसी कांगड़ा और नगर निगम आयुक्त को इस कमेटी का सदस्य बनाया गया है। ट्रिब्यूनल ने कमेटी को आदेश दिए कि वह इस मामले की जांच करे और अपनी अनुपालना रिपोर्ट ई-मेल के माध्यम से 10 नवंबर तक ट्रिब्यूनल को भेजे।
स्थानीय निवासी महेंद्र सिंह की ओर से लिखे पत्र पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने संज्ञान लिया है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम धर्मशाला में कार्यरत कनिष्ठ अभियंता ने छह मंजिला भवन निर्माण किया है। हालांकि, यह भवन उसकी पत्नी के नाम पर है, फिर भी स्वयं निगम में होते हुए नियमों के विपरीत निर्माण किया गया है। कनिष्ठ अभियंता पर आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप भी लगाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि कनिष्ठ अभियंता गैर कानूनी तरीके से अवैध निर्माण, आवंटन और पेड़ कटान में संलिप्त है। ट्रिब्यूनल ने पाया कि पत्र में लगाए गए आरोप गंभीर है। इसकी जांच और रोकथाम जरूरी है। ट्रिब्यूनल ने कमेटी को आदेश दिए कि वह याचिकाकर्ता के आरोपों की जांच करे और इसके रोकथाम के लिए कानूनी तौर पर आवश्यक कदम उठाएं।