प्रदेश में लंपी स्किन वायरस से मरने वाले पशुओं की संख्या शनिवार को घटकर 115 पहुुुंच गई। प्रदेश में अभी तक कुल 1,758 पशुओं की मौत इस वायरस से हो चुकी है। वायरस की चपेट में आने के बाद तेज बुखार आने से पशु दूध देना बंद कर रहे हैं या फिर दूध कम देने लगे हैं। कमजोर पशु पर वायरस की मार ज्यादा पड़ती है। पशुओं में यह वायरस करीब बीस दिन तक रहता है और इसके बाद पशु ठीक होने लगते हैं।
जिला कांगड़ा में अभी लंपी स्किन वायरस से ग्रसित पशुओं की संख्या बढ़ी है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में शनिवार को लंपी स्कि न वायरस की चपेट में आए पशुओं की कुल संख्या 46,563 तक पहुंच गई है, जबकि कुल 115 पशुओं की मौत हो गई। अभी तक प्रदेश में कुल 1,758 पशुओं की बीमारी से मौत हो चुकी है। कुल 16,020 पशु वायरस को मात देकर ठीक हो चुके हैं।
मिल्क फेडरेशन के प्लांटों में हर रोज पहुंच रहा जरूरत का दूध
हिमाचल प्रदेश मिल्क फेडरेशन के अध्यक्ष निहाल चंद कहते हैं कि फेडरेशन के पास हर रोज 1.30 लाख लीटर दूध दत्तनगर, मंडी, नाहन, नालागढ़, कांगड़ा और ऊना के संयंत्रों में पहुंच रहा है। लंपी स्किन वायरस के बाद भी दूध की आपूर्ति में फिलहाल कई कमी नहीं आई है।
वायरस से निपटने को वैक्सीन मुफ्त, पैसे वसूले तो कार्रवाई
प्रदेश पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. प्रदीप शर्मा कहते हैं कि लंपी स्किन वायरस से निपटने के लिए वैक्सीन की 92,095 डोज उपलब्ध हैं। शनिवार को पशुओं की मौत कम हुई है। कांगड़ा में अभी सुधार नहीं हुआ है, जबकि अन्य जिलों में सुधार हो रहा है। हैदराबाद की कंपनी से वैक्सीन आ रही है और अलग-अलग सप्लायर आपूर्ति कर रहे हैं। उनका कहना है कि पशुओं में वैक्सीन मुफ्त लगा रहे हैं। अगर कोई पैसे ले रहा है तो ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।