देश-विदेश से घूमने कुल्लू-मनाली पहुंच रहे सैलानियों के साहसिक गतिविधियां जानलेवा साबित हो रही हैं। नियमों की अनदेखी के चलते राफ्टिंग का रोमांच भारी पड़ रहा है। कुल्लू-मनाली में हर साल औसतन एक सैलानी की जान राफ्टिंग करते हुए जा रही है। कई लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं। पैसा कमाने के लिए राफ्ट में तय नियम से ज्यादा लोग बैठाए जा रहे हैं। गाइड और असिस्टेंट भी प्रशिक्षित नहीं होते हैं, जो ऐन मौके पर हादसे के समय जान बचा सकें।
यहां दी जाने वाली लाइफ जैकेट इतनी पुरानी होती हैं कि डूबते राफ्टर को बचाने में मददगार कम ही साबित होती हैं। शुक्रवार को ब्यास नदी में बाशिंग के पास हुए हादसे में भी ऐसी ही लापरवाही सामने आई है। बबेली से रामशिला के लिए आ रही राफ्ट में तय मानकों का ध्यान नहीं रखा गया था। नियमों को दरकिनार करके राफ्ट में सात लोग बैठाए गए थे। राफ्ट में छह लोग बैठ सकते हैं। राफ्टिंग गाइड के साथ इसमें कुल आठ लोग सवार हो गए थे।
बताया जा रहा है कि बबेली से राफ्ट ब्यास की जलधारा में उतरी, इसके बाद छरूडू नामक जगह पर अचानक पलट गई। अगर गाइड और ऑपरेटर ने नियमों का पालन किया होता तो शायद यह हादसा नहीं होता। पर्यटक की जान भी बच जाती। हालांकि इससे पहले ब्यास नदी में अन्य जगहों पर भी इस तरह के हादसे पेश आए हैं।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर नियमों का पालन करवाए तो कौन। अटल बिहारी पर्वतारोहण संस्थान मनाली के निदेशक अविनाश नेगी का कहना है कि राफ्ट में अनुमति छह यात्रियों को बैठाने की होती है। इसके साथ गाइड और असिस्टेंट का भी होना जरूरी होता है। रेस्क्यू के लिए साथ में राफ्ट भी होती है। उपायुक्त आशुतोष गर्ग ने कहा कि कुल्लू में राफ्टिंग के दौरान हुए हादसे की जांच करवाई जा रही है।