देश की नई शिक्षा नीति में पूरे देश में सरकारी और निजी स्कूलों में एक जैसे पाठ्यक्रम की वकालत राइट टू एजूकेशन फोरम ने की है। साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अध्यापकों की बैक डोर एंट्री की बजाए कमीशन के माध्यम से अध्यापकों की तैनाती और राष्ट्रीय स्तर पर अध्यापक पात्रता परीक्षा का एक स्वरुप का सुझाव भी दिया है।देश की नई शिक्षा नीति को लेकर शुक्रवार को धर्मशाला में आईटीई फोरम की प्रदेश स्तरीय संगोष्ठी हुई। उत्तराखंड आरटीई फोरम के प्रदेशाध्यक्ष रघु तिवारी की अध्यक्षता में संगोष्ठी में प्रदेश भर से शिक्षाविद जुटे। शिक्षकों और शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों ने कहा कि प्रदेश में टेट का प्रश्नपत्र सेट करने वालों को टेस्ट की जानकारी नहीं है।
ऐसे में उन्होंने इसे कमीशन ही बनाकर रख दिया है। देश और प्रदेश के टेट में तुलनात्मक अध्ययन होना चाहिए। शिक्षा विभाग सहित विभिन्न विभागों से स्कूलों को आंकड़े मांगने के नाम पर दो से तीन डाक टाइम बांड के हिसाब से भेजी जाती हैं। ऐसे में अध्यापकों का अधिकतर समय इन डाक का जवाब तैयार करने में ही खप जाता है। इसलिए इसका भी सप्ताह में एक दिन निर्धारित करने की मांग शिक्षकों ने उठाई। इससे कि शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी और शिक्षकों के गैर शैक्षणिक कार्यों में व्यस्तता को कम करने पर भी विचार किया गया।
संगोष्ठी के माध्यम से पाठ्यक्रम में एकरुपता, किताबों की छपाई की क्वालिटी, अध्यापकों की केवल नियमित नियुक्ति, शैक्षणिक योग्यता के अनुसार प्राइमरी स्तर से कॉलेज कैडर तक अध्यापकों की पदोन्नति, स्नातक स्तर पर पढ़े विषयों को अध्यापकों को पढ़ाने, राष्ट्रीय स्तर पर टेट में एकरुपता, नीट को नंबर के बजाए पास मार्क्स आधार और अध्यापक प्रशिक्षण को आवश्यकता आधार पर करने का प्रस्ताव तैयार कर मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजा है। उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा कांगड़ा राजकुमार, डाइट धर्मशाला से डॉ. जोगिंद्र और राजकपूर, आरटीई फोरम के प्रदेश सदस्य संजय चौधरी, फोरम के प्रदेश सह संयोजक रमेश मस्ताना, मित्ररंजन, आरटीडीसी संस्था पालमपुर से सुखदेव विश्वप्रेमी मौजूद रहे।