हिमाचल में ब्याह-शादियों में भले ही एक दिन में लाखों रुपये खर्च कर दिए जाते हैं, लेकिन शिमला जिले के ठियोग, कोटखाई, चौपाल और ऊपरी क्षेत्रों में आज भी परैणा विवाह का चलन है जिसमें लड़की के घरवालों का एक भी पैसा खर्च नहीं होता। इस प्रथा में दूल्हा नहीं बल्कि दुल्हन सजधज कर अपने होने वाले ससुराल में ब्याह रचाने पहुंचती है। यहां तक कि दूल्हे के परिजन ही उसे गाड़ी में लेने आते हैं।
दूल्हे के घर पर मंडप सजता है और वहीं सात फेरे होते हैं। दूल्हे के सिर पर न सेहरा होता है और न ही कोई बैंड बाजा। शादी बिलकुल सादे तरीके से होती है। लड़की के मां-बाप न तो अपनी बेटी की शादी में शामिल होते हैं और न ही कन्यादान करते हैं। शादी समारोह में धाम भी दूल्हा ही देता है। इसके बाद दुल्हन का गृह प्रवेश हो जाता है।