दोपहर 12 बजे खत्म किया महिलाओं ने 24 घंटे का धरना अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कमला नेहरू अस्पताल से गायनी ओपीडी शिफ्ट करने पर वीरवार को महिलाओं ने गाना गाकर विरोध जताया। धरने के अंतिम क्षणों में महिलाओं ने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। दोपहर 12:00 बजे धरना खत्म हुआ।
महिलाओं ने सरकार के विरोध में नारे लगाने की बजाए गाने गाए। महिलाओं ने ओ सुक्खूआ नइयों सुनदा..., सारे जनता विरोधी फैसले समेत अन्य पहाड़ी नाटी गाकर सरकार को जगाने का काम किया। महिलाओं ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से महिलाओं के बारे में सोचा नहीं जा रहा है। आईजीएमसी के प्रसूता कक्ष के बाहर महिला मरीजों को कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है। ऑपरेशन तक की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। महिला विरोधी सरकार गलत निर्णय लेती जा रही है। सरकार राजनीतिक रोटियां सेंकने का कार्य कर रही है। सरकार दावे कर रही है कि महिलाओं को वह बेहतर सुविधाएं देना चाहती है, लेकिन टेस्ट शुल्क तक में लगातार वृद्धि की जा रही है। महिलाओं ने विरोध में बुधवार दोपहर 12:00 बजे अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के बैनर तले धरना शुरू किया। 24 घंटे तक चले इस धरने में महिलाओं ने गायनी ओपीडी को आईजीएमसी से वापस लाने के लिए कहा।
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समिति की राज्य अध्यक्ष रंजना ने कहा कि सरकार बार-बार कह रही है कि हम महिलाओं को बेहतर सुविधाएं देना चाहते हैं लेकिन टेस्ट में भारी शुल्क वृद्धि कर दी है। स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की कमी खल रही है। सरकार के सलाहकार गलत राय देकर स्वास्थ्य विभाग का निजीकरण करने की योजना बनाते रहते हैं। जनवादी महिला समिति ने केएनएच के चिकित्सा अधीक्षक के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. कर्नल धनीराम शांडिल समेत स्वास्थ्य सचिव, प्रधानाचार्य आईजीएमसी, गायनी विभाग की एचओडी को ज्ञापन भी भेजे हैं। जनवादी महिला समिति को विश्वास है कि सरकार और मंत्री महिलाओं की बात को समझेंगे। आगामी दिनों में सरकार ने निर्णय वापस न लिया तो 30 अप्रैल को आईजीएमसी के बाहर जोरदार प्रदर्शन करने की चेतावनी दी।
प्रसूता और गायनी विभाग को अलग नहीं कर सकते : चौहान
समिति महासचिव फालमा चौहान ने कहा कि सरकार को विश्व स्वास्थ्य संगठन और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देश का अध्ययन करना चाहिए। निर्देशों में स्पष्ट है कि प्रसूता और गायनी विभाग को अलग नहीं किया जा सकता लेकिन सरकार ने बिना कुछ सोचे समझे फैसले लिए है। इस फैसले से प्रशिक्षु भी परेशान हो गए हैं। स्टाफ को भी आईजीएमसी में अभी कोई सुविधा नहीं मिल रही है। सरकार ने सिर्फ रोबोटिक सर्जरी के लिए महिलाओं को परेशान करने में लगी हुई है। यह सुविधा कमला नेहरू अस्पताल में भी शुरू की जा सकती है।