जो रोग के नियंत्रण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली आवश्यक दवाइयां को प्रभावित क्षेत्रों में आपूर्ति एवं वितरण पर निगरानी रखेगी। इस वर्ष फरवरी से ही उच्च आर्द्रता का वातावरण बना है। इससे इस रोग के बीजाणु पनप रहे हैं।
डॉ. धीमान ने कहा कि अखरोट के आकार के सेब पर मेन्कोजेब या प्रोपिनेब या डोडीन अथवा माइक्लोबुटानिल का छिड़काव करें। छिड़काव के एक-दो घंटे बाद बारिश होती है तो दूसरे दिन फिर छिड़काव करें।
फफूंद से होता स्कैब रोग
कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू के बागवानी विशेषज्ञ एवं प्रभारी डॉ. नरेंद्र कायथ ने कहा कि स्कैब फंफूद से पैदा होने वाली बीमारी है। पत्तियों में फैलने से समय से पहले बगीचों में पतझड़ शुरू हो जाती है। जहां स्कैब फैल चुका है, वहां उसे अभी रोका जा सकता है। बीमारी से ग्रस्त फल ठीक नहीं हो सकते।