कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं के वैज्ञानिकों ने 6.25 बीघा में न्यूट्री गार्डन की नई अवधारणा पर आधारित प्रदर्शनी फार्म तैयार किया है। सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती के तहत इस न्यूट्री गार्डन में कई तरह की सब्जियों के साथ-साथ तिलहनी व दलहनी फसलें उगाई गई हैं ताकि बाजार पर लोगों की निर्भरता कम हो और आत्मनिर्भर बन पैसों की भी बचत कर सकें। शहरों में भी इस अवधारणा के साथ किचन गार्डन की तरह न्यूट्री गार्डन घर के आंगन या छतों पर भी तैयार किया जा सकता है।
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अपनी जरूरत के अनुसार लोग सब्जियां उगा सकते हैं। इससे बाजार में मिलने वाली रसायनयुक्त सब्जियों से भी छुटकारा मिलेगा। धौलाकुआं में विकसित किए गए प्रदर्शनी फार्म के माध्यम से वैज्ञानिक लोगों को यही बताने के प्रयास में जुटे हैं कि प्राकृतिक खेती से सब्जियां उगाकर अपने परिवार की जरूरत पूरी की जा सकती हैं। 12 माह लोग हरी सब्जियां प्राप्त कर सकते हैं जो पौष्टिकता से भरपूर हैं।
शून्य लागत खेती के गुर सीखाने के लिए विकसित फार्म में किसानों को इस दिशा में लगातार प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इस न्यूट्री गार्डन में ब्रोकली, गोभी, मूली, पालक, मैथी व मटर आदि किस्मों की सब्जियां उगाई गई हैं और कैलेंडर के अनुसार इनका उत्पादन किया जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि लोग कम जमीन पर भी सभी प्रकार की दलहन, तिलहन व सब्जियां इत्यादि उगा सकते हैं।
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इससे उनकी रसोई की सभी जरूरतें यहीं से पूरी हो सकती हैं। इस नई अवधारणा से लोगों की बाजार पर निर्भरता को कम किया जा सकता है। इससे हर माह बाजार से खरीदी जाने वाली सब्जियों पर खर्च होने वाले बजट में भी कटौती होगी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन फार्म में सभी उत्पादों का मूल्यांकन भी किया जाता है और किसानों को तकनीकी जानकारियां भी दी जा रही हैं।