प्रदेश में 261 नर्सों की तैनाती पर फैसला नहीं हो पा रहा है। किस आधार पर नियुक्ति की जाए। इसको लेकर मामला उलझा हुआ है। दो माह पहले अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड ने स्टाफ नर्स का चयन कर सूची स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी है।
स्वास्थ्य महकमा यह तय नहीं कर पा रहा है कि उनकी तैनाती रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) के माध्यम से या फिर सीधे अनुबंध के आधार पर की जाए। इसे कैबिनेट में ले जाया जाना था, लेकिन इसे लगातार लटकाया जा रहा है।
सूबे में करीब 600 से अधिक स्टाफ नर्सों के पद खाली हैं। अकेले आईजीएमसी में ही 300 से अधिक पद खाली हैं। स्वास्थ्य महकमे की ओर से खाली पदों को भरने के लिए तेजी नहीं दिखाई जा रही है। चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन वेतन निर्धारण को लेकर मामला लटका हुआ है।
कहा जा रहा था कि इसे कैबिनेट में ले जाया जाएगा, लेकिन पिछली तीन कैबिनेट के एजेंडे में इसे शामिल ही नहीं किया जा रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि स्वास्थ्य महकमा मरीजों को लेकर कितना चिंतित है।
दरअसल, रोगी कल्याण समिति के माध्यम से स्टाफ नर्स की तैनाती करने की स्थिति में तीन साल की सेवा पूरी होने पर अनुबंध आधार पर रखा जाएगा। उसके छह साल बाद वह नियमित होने योग्य होंगी। सीधे अनुबंध आधार पर तैनाती करने की स्थिति में छह साल बाद नियमित किया जा सकता है।