नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) ने 77 दवाइयों की कीमतों में संशोधन किया है। अब यह दवाएं सरकार के तय मूल्यों पर एक ही रेट पर बेची जाएंगी। कई महंगी ब्रांडेड दवाएं सस्ती हो गई हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर लगने वाले टैक्स से रेट कुछ ऊपर-नीचे हो सकते हैं।
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एनपीपीए ने 23 एवं 24 जून को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। इन दवाइयों में 45 शेड्यूल्ड फार्मूलेशन पैक की कीमतों में संशोधन (मूल्य नियंत्रण) संशोधन आदेश-2016 और 12 दवाओं की खुदरा कीमतें संशोधन आदेश-2013 के तहत निर्धारित की हैं।
इसके लिए तमाम दवा निर्माताओं को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे पुरानी कीमतों पर उत्पादन बंद करें। अधिकांश दवाओं का उत्पादन जिला सोलन के बीबीएन और सिरमौर में किया जा रहा है। इनमें एंटीबायोटिक, दर्द निवारक, बीपी और शूगर की दवाएं भी शामिल हैं।
सभी उत्पादकों को जो ब्रांडेड और जेनरिक दवाओं के वर्जन मार्केट में बेच रहे हैं उन्हें सीलिंग प्राइज (स्थानीय कर समेत) के भीतर ही दवाएं बेचने के निर्देश हैं। इन 77 दवाओं के उत्पादन में देश की नामी कंपनियां लगी हैं। कीमतें भी सस्ती होंगी।
जैसे मैडोमोक्सिल एवं टेलमिसारटिन साल्ट वाली बीपी की दवा एक कंपनी 14.5 प्रति टेबलेट बेच रही है तो दूसरी इसी साल्ट की दवा 7 रुपये में मिल रही है। सीलिंग मूल्य तय होने पर दोनों दवाएं समान कीमत पर ही मिलेगी।
ये हैं 12 अन्य दवाएं
डिक्लोफेनिक सोडियम इंजेक्शन (वोलिट्रा एक्यू), मेटफोरमिन एचसीएल और ग्लीकेजाइड टेबलेट, एलबेंडाजोल और आइवर मेक्टिन टेबलेट, मौक्सिफ्लोक्सेसिन और सेफिग्जाइम टेबलेट, डिक्लोमाइन टेबलेट, रेबप्रेजोल सोडियम और डोम्पेरिडन कैप्सूयल, मैटफोरमेन एचसीएल और ग्लिकलेजाइड टैबलेट, क्लिंडेमाइसिन फोसफेट और हाइड्रस बैंजायल टैबलेट, टेलमिसारटिन इनडेपेमाइड टैबलेट, ट्रेमाडाल एचसीएल और डिक्लोफेनिक सोडियम, पेरासिटामोल इंजेक्शन और टेलमिसारटिन और नेबीवोलोल टैबलेट।