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पेयजल कंपनी में घमासान, कर्मचारियों के बाद अब अधिकारियों के तबादले

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जल शक्ति विभाग ने सहायक अभियंता को कंपनी से हटाकर मंडी भेजा
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शिमला। राजधानी की पेयजल व्यवस्था संभाल रही कंपनी की कमान को लेकर सरकार के दो दिग्गज मंत्रियों के बीच छिड़ी सियासत के चलते कर्मचारियों के बाद अब अधिकारियों के तबादले शुरू हो गए हैं। इससे पेयजल कंपनी में फिर हड़कंप मच गया है।
अब शहर को 24 घंटे पेयजल सुविधा देने के लिए तैयार किए गए सतलुज वाटर प्रोजेक्ट का काम देख रहे सहायक अभियंता उमेश शर्मा का तबादला कर दिया है। जलशक्ति विभाग ने इन्हें भी बाकी कर्मचारियों की तरह मंडी जिले में ट्रांसफर किया है। एक और सहायक अभियंता का तबादला भी हुआ है लेकिन इन्होंने इसे रद्द करवा दिया है।
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सूत्रों के अनुसार कुछ और अधिकारियों के भी तबादले की तैयारी है। इसी हफ्ते इनकी भी सूची निकल सकती है। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले तबादलों की तरह इस बार भी कंपनी में खाली हुए पदों पर जलशक्ति विभाग ने किसी को तैनाती नहीं दी है। विभाग सिर्फ अपने कर्मचारियों और अधिकारियों को कंपनी से वापस बुला रहा है।
कंपनी की कमान संभालने को लेकर अब तक जितने भी तबादले हुए हैं, वह सभी मंडी जिला के लिए किए गए हैं। बीते हफ्ते मंडी ट्रांसफर किए दो कर्मचारियों ने विधायक से सिफारिश लगाकर अपने तबादले रद्द भी करवा दिए हैं। यह वापस कंपनी में पहुंच गए हैं। जलशक्ति विभाग धीरे-धीरे कंपनी दफ्तर से लेकर पंपिंग स्टेशनों पर तैनात अपने कर्मचारी वापस बुला रहा है। एक महीने के भीतर आधा दर्जन से ज्यादा कर्मचारियों के तबादले हो चुके हैं।
गड़बड़ा सकती है शहर की पेयजल व्यवस्था
कंपनी से बीते महीने कनिष्ठ अभियंता समेत कई कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो गए हैं। कंपनी ने इनकी जगह आउटसोर्स अभियंता को तैनाती दी है। लेकिन कार्यालय और पंपिंग स्टेशनों पर खाली हो रहे पदों के लिए अभी तैनाती नहीं हो पाई है। इससे आने वाले दिनों में शहर की पेयजल व्यवस्था भी गड़बड़ा सकती है। वहीं तबादलों से अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। कंपनी में जलशक्ति विभाग के 170 से ज्यादा कर्मचारी और अधिकारी तैनात है। लेकिन जलशक्ति विभाग अब अपने स्टाफ को कंपनी से वापस बुला रहा है।
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ऐसे शुरू हुआ है विवाद
नगर निगम ने शहर की पेयजल व्यवस्था कंपनी के हवाले कर रखी है। इस कंपनी की कमान पहले जलशक्ति विभाग के अधीक्षण अभियंता रैंक के अधिकारी के पास थी। इनकी पदोन्नति के बाद विभाग ने इसी रैंक के एक अन्य अधिकारी को कमान संभालने के लिए भेजा। यह अधिकारी सरकार के एक दिग्गज मंत्री के करीबी माने जाते हैं लेकिन दूसरे मंत्री ने कंपनी ने इन्हें कमान नहीं दी। अधिकारी छह महीने से कंपनी में खाली बैठे हैं। इसी विवाद के चलते अब जलशक्ति विभाग कंपनी से अपने कर्मचारी वापस बुला रहा है।
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