हिमाचल प्रदेश में 1972 से पहले से रह रहे गैर कृषकों को भूमि खरीदने की अनुमति देने के लिए प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफार्म्स एक्ट में संशोधन के हाईकोर्ट के निर्देश को सुप्रीम कोर्ट द्वारा निरस्त करने के साथ ही गैर कृषकों के कृषक बनने का सपना टूट गया है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट के फैसले को खारिज करने के साथ ही सरकार ने राहत की सांस ली है। दरअसल, हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक्ट में संशोधन के लिए तीन महीने का समय दिया था।
साथ ही यह भी कहा था कि एक्ट की धारा 118 से संबंधित लंबे समय से मुकदमेबाजी चल रही है क्योंकि वह बिना सरकार की अनुमति लिए जमीन नहीं खरीद सकते जबकि वह लंबे समय से प्रदेश में रह रहे हैं।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद प्रदेश सरकार ने कैबिनेट बैठक में आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाने का फैसला लिया था। जिसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देते हुए स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दाखिल की थी।
अब सुप्रीम कोर्ट से आदेश खारिज होने के बाद एक बार फिर प्रदेश या प्रदेश के बाहर के गैर कृषकों को प्रदेश में जमीन खरीदने के लिए सरकार से एक्ट की धारा 118 के तहत अनुमति लेना जरूरी रहेगा।