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अब कारगिल तक आसानी से पहुंचेगी हमारी सेना

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समुद्र तल से 16,300 फीट ऊंचा शिंकुला दर्रा सड़क से जुड़ गया है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के दीपक प्रोजेक्ट ने महीनों की कड़ी मशक्कत के बाद वैकल्पिक मार्ग तैयार किया है जो सीधे कारगिल से जोड़ेगा। शनिवार को दारचा से शिंकुला तक मार्ग को छोटे वाहनों के लिए अधिकारिक तौर पर खोल दिया गया है।
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बीआरओ के कमांडर कर्नल केपी राजेंद्र ने शनिवार को सिस्सू में रोहतांग राइडर सोलो बाइक रैली को हरी झंडी दिखाकर शिंकुला दर्रे की ओर रवाना किया। इस मार्ग पर फिलहाल छोटे और फोर वाई फोर वाहनों को ही जाने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, अभी जम्मू की ओर से सड़क निर्माण शेष है। इसे बीआरओ का हिमांक विंग बना रहा है।
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275 किमी कम होगी मनाली से कारगिल की दूरी

काम पूरा होते ही मनाली से कारगिल की दूरी 275 किमी कम हो जाएगी। शिंकुला दर्रा हिमाचल को जम्मू-कश्मीर से जोड़ता है। इस मार्ग के बनने से पाकिस्तान-चीन सीमा से सटे कारगिल क्षेत्र में सेना आसानी से पहुंच सकेगी। विपरीत परिस्थितियों में रसद को सीमा पर आसानी से और जल्द पहुंचाया जा सकेगा। इस सड़क से सीमा तक पहुंचने के लिए बड़े-बड़े दर्रों को भी पार नहीं करना पड़ेगा।

वर्तमान में कारगिल तक पहुंचने लिए मनाली-लेह सड़क एक वैकल्पिक मार्ग है। कारगिल युद्ध के दौरान इस मार्ग से ही सेना ने सीमा तक रसद पहुंचाई थी। लेकिन करीब 750 किलोमीटर ये मार्ग रोहतांग, बारालाचा, खार्दुंगला और तंगलंगला जैसे दर्रों से होकर गुजरता है। विधायक रवि ठाकुर और जिप सदस्य रिग्जिन समफेल हायरप्पा ने बीआरओ को मार्ग बहाल करने पर बधाई दी है।
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