प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि पंचायत स्तर पर लोगों को विभिन्न प्रमाणपत्र और भूमि इंतकाल जैसी राजस्व सेवाएं घर द्वार के निकट देने के लिए शिविरों का आयोजन किया जाएगा।
‘लोक प्रमाण पत्र सॉफ्टवेयर’ की सहायता से 12 तरह के प्रमाणपत्रों जिनमें कृषक, डोगरा क्लास, ग्रामीण क्षेत्र, पिछड़ा क्षेत्र, स्वतंत्रता सेनानी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, हिमाचली मूल निवासी प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, अन्य पिछड़ा वर्ग, चरित्र, वारिस और समुदाय संबंधी प्रमाण पत्र शामिल हैं।
यह जानकारी पंचायतीराज मंत्री अनिल शर्मा ने दी। उन्होंने कहा कि समस्त उपायुक्तों को राजस्व अधिकारियों को पंचायत स्तर पर लोगों को प्रमाण पत्र जारी करने के लिए शिविरों के आयोजन के लिए निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से नागरिकों को प्रमाण पत्र एक निश्चित स्थान पर उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे समय की भी बचत होगी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि तहसीलदार, नायब तहसीलदार, संबंधित पटवारी और पंचायत सचिव को प्रमाण पत्र जारी करने के अलावा ये अधिकारी संबंधित रिकार्ड के सत्यापन और शिविरों के दौरान प्रमाणपत्रों के प्रकाशन के लिए आवश्यक उपकरण एवं इंटरनेट सेवा उपलब्ध करवाएंगे।
राज्य में लगभग पांच महीनों के दौरान 3200 से अधिक पंचायतों में शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जिसके तहत एक माह के दौरान 140 तहसीलों और उपतहसीलों की लगभग 560 पंचायतों में ये शिविर लगाए जाएंगे। प्रत्येक तहसील की चार पंचायतों में प्रत्येक माह के हर सप्ताह एक निश्चित दिन पर एक शिविर आयोजित किया जाएगा।