सूबे की सात नदियों की निगरानी अब ड्रोन कैमरे से की जाएगी। प्रदूषित हो रहीं नदियों के संरक्षण की कवायद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शुरू कर दी है। नदियों में कूड़ा-कचरा, मलबा, सीवरेज और खनन जैसी अवैध गतिविधियों को ड्रोन में कैद किया जाएगा।
इसके अलावा बाढ़ की संभावना और नदियों के तटों पर रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी काम किया जाएगा। इसी मकसद से मनाली के ब्यास कुंड से ब्यास नदी की मैपिंग की जा रही है।
इस प्रक्रिया में न केवल ब्यास नदी को शामिल किया जा रहा है बल्कि नदी में कितनी सहायक नदियां व नाले हैं, उनकी भी रिकॉर्डिंग की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कुल्लू के सहायक अभियंता प्रदीप मोदगिल ने कहा कि एनजीटी के आदेश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ब्यास नदी की मैपिंग का कार्य शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि कुछेक अति संवेदनशील क्षेत्रों को छोड़कर नेहरू कुंड से लेकर औट तक इसकी मैपिंग का कार्य पूरा हो गया है। आगे भी यह प्रक्रिया जारी है।
इन नदियों की होगी ड्रोन मैपिंग
ब्यास के अलावा सुखना, मारकंड, सिरसा, अश्विनी, गिरि और पब्बर नदियों की ड्रोन मैपिंग होगी।
एनजीटी से पड़ चुकी है फटकार
ब्यास नदी के प्रदूषण को लेकर जिला प्रशासन, नगर परिषद कुल्लू, आईपीएच, टीसीपी और प्रदूषण बोर्ड को एनजीटी से फटकार पड़ चुकी है। बावजूद इसके मनाली से लेकर जगह-जगह गंदगी खुले में ब्यास नदी में बह रही है।