इससे संस्थानों में जाली फेकल्टी और संस्थान में हाजिर नहीं होने वाले विद्यार्थियों पर नजर रहेगी।
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हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग ने राज्य के सभी निजी शिक्षण संस्थानों को बायोमीट्रिक मशीनें लगाने के आदेश जारी किए हैं। नियामक आयोग ने ये फैसला सुनाते हुए कहा है कि इससे ऐसे संस्थानों में जाली फेकल्टी और संस्थान में हाजिर नहीं होने वाले विद्यार्थियों पर नजर रहेगी।
नियामक आयोग ने फैसला सुनाते हुए सोलन जिले के कसौली के एक संस्थान से ली गई दो डिग्रियों को भी जाली करार दिया। आयोग के सदस्य सुनील दत्त शर्मा की कोर्ट ने ये फैसला कंवलप्रीत सिंह की शिकायत का निपटारा करते हुए कसौली के चांदी स्थित एक बीएड कॉलेज के खिलाफ की गई अपील पर सुनाया है।
आयोग ने कहा कि दोनों विद्यार्थी सुमित दास और हबीबउद्दीन शेख शैक्षणिक सत्र 2011-12 में संस्थान के नॉन अटेंडिंग विद्यार्थी थे। इन दोनों विद्यार्थियों की ओर से बीएड की डिग्रियां जाली तरीके से हासिल की गईं। इस संस्थान में एक छात्र की हाजिरी 65 प्रतिशत और दूसरे की 63 प्रतिशत हाजिरी रही हैं।
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने पाया है कि दोनों ही विद्यार्थी इस संस्थान में विद्यार्थी होने के अलावा पश्चिम बंगाल में एक संस्थान में शिक्षक भी थे। डिग्रियां देने का ये मामला हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से संबंधित है और ये विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के दायरे में नहीं आता है।
संस्थान की ओर से की गई अनियमितताओं और डिग्रियां रद्द करने का मामला हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से संबंधित है। ऐसे में डिग्री रद्द करने का मामला विश्वविद्यालय के ध्यान में लाया है। आयोग ने कहा कि प्रतिवादी संस्थान ने निश्चित तौर पर कुछ अनियमितताएं की हैं।
प्रतिवादी संस्थान को निर्देश दिए कि विद्यार्थियों से लिए 200 रुपये वेरिफिकेशन शुल्क को रिफंड किया जाए। साथ ही प्रतिवादी संस्थान 10 प्रतिशत की दर से ट्यूशन फीस के लेवी चार्जेस लौटाए।