हाईकोर्ट ने मनी लांड्रिंग मामले में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह को राहत प्रदान करने से इनकार कर दिया। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के उस फैसले पर रोक लगाने से किया जिसमें इन दोनों की कुछ संपत्ति को जब्त करने को कहा गया था।
मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वे पहले ईडी का पक्ष सुनेंगे और उसी के बाद स्थगन आदेश के मुद्दे पर कोई निर्णय लिया जाएगा। अदालत ने ईडी व वित्त मंत्रालय को नोटिस जारी कर दायर याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 27 मई तय की है।
वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी ने ईडी के के 23 मार्च को जारी संपत्ति जब्ती आदेश को चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि ईडी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह निर्णय किया है। इसके अलावा उन्होंने अदालत से उनके खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत 26 अप्रैल को जारी नोटिस को भी रद्द करने की मांग की है।
याची की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिब्बल ने कहा कि यह कार्रवाई क्षेत्राधिकार और कानून के अधिकार के बाहर जाकर की जा रही है। ईडी ने प्रतिभा सिंह की 5,79,84,989 रुपये व वीरभद्र सिंह की 1,34,64,609 रुपये संपत्ति जब्त की है। उन्होंने कहा कि
इस मामले में अभी तक किसी के खिलाफ भी आरोप पत्र दायर नहीं किया गया है। इसके अलावा उनके मुवक्किलों के खिलाफ कोई भी साक्ष्य नहीं है जिसके आधार पर कार्रवाई की जा सके। ईडी मात्र कुछ बाहरी कारणों, दुर्भावनापूर्ण और मनमाने ढंग से कार्रवाई कर रहा है।