हिमाचल में चार तरह के साल्ट से बनने वाली प्रतिबंधित नशीली दवाओं को तैयार नहीं किया जा सकेगा। सरकार के निर्देशों के बाद दवा नियंत्रण प्राधिकरण ने प्रदेश के दवा निर्माताओं के प्रोडक्ट लाइसेंस रद्द कर दिए हैं।
प्रदेश के युवाओं में बढ़ रही इन दवाओं के नशे की प्रवृति को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है। लिहाजा, अब संबंधित फार्मा उद्योग अब न तो इस साल्ट के सिंगल ड्रग्स (पूरे साल्ट की एक दवा) उत्पादन कर सकेगा, न ही फिक्स्ड डोज कंबिनेशन (मिश्रित साल्ट की दवा) तैयार कर सकेंगे।
15 सितंबर को प्रदेश ड्रग्स कंट्रोलर विभाग ने सरकार के निर्देशों के बाद यह आदेश जारी किए हैं। इसकी सूचना प्रदेश के तमाम फार्मा यूनिटों समेत ड्रग्स इंस्पेक्टर, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग को जारी कर दी गई है। दावा किया जा रहा है कि प्रदेश में पहली बार किसी सरकार ने इन दवाओं के प्रोडक्ट लाइसेंस रद्द किए हैं।
10 से 20 फीसदी मार्केट शेयर
एक अनुमान के मुताबिक हिमाचल में कुछ फार्मा उद्योगों के पास इसके लाइसेंस हैं। फार्मा मार्केट में 10 से 20 फीसदी तक हिमाचल में बनी इस साल्ट की दवाओं का मार्केट शेयर है। हालांकि, ड्रग्स विभाग का कहना है कि नाममात्र उत्पादन है, लेकिन फिक्स्ड डोज कंबिनेशन में मिसयूज के काफी चांसिस हैं।