इस प्रोेजेक्ट के तहत मंगवाए विदेशी पौधों के वायरसयुक्त होने और खराब होने पर बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह कड़ी आपत्ति जता चुके हैं। मंत्री विदेशी कंसल्टेंसी के लिए भी 100 करोड़ रुपये का प्रावधान करने को बेवजह बता चुके हैं।
सूत्रों ने बताया कि प्रोजेक्ट लागू होने के दो साल मेें इस प्रोजेक्ट के 50 करोड़ खर्च नहीं किए जा सके, जबकि इसके लिए हर साल कुल बजट का पांचवां हिस्सा खर्च करने के निर्देश थे। इस पूरी अव्यवस्था के बीच अब विश्व बैंक ने हिमाचल सरकार को ताजा नोटिस जारी किया है।
प्रधान सचिव बागवानी आरडी धीमान ने विश्व बैंक की ओर से एक माह में एक्शन प्लान देने का नोटिस मिलने की तो पुष्टि की, मगर उन्होंने इस प्रोजेक्ट को महीने भर के लिए अस्थायी तौर पर स्थगित करने से अनभिज्ञता जताई। मंत्री महेंद्र सिंह ने भी ताजा घटनाक्रम से अनभिज्ञता जताई।