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चिट फंड घोटाले में हिमाचल सरकार, दिल्ली की कंपनी को नोटिस

Fri, 20 Jan 2017 11:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल हाईकोर्ट
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हिमाचल में कांगड़ा से जुड़े कथित चिट फंड घोटाले की जांच के आग्रह को लेकर दायर याचिका में प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार सहित क्राइस्ट मार्केटिंग लिमिटेड दिल्ली और इस कंपनी के हिमाचल में कार्यरत क्षेत्रीय प्रबंधक को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने कांगड़ा के स्थानीय निवासियों द्वारा दायर याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान यह आदेश दिए।
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याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार दिल्ली की प्रतिवादी कंपनी ने अगस्त 2008 में कांगड़ा के ज्वाली में अपना कार्यालय खोला था। साल 2010 में इस कार्यालय को मकड़ बदल दिया। प्रार्थियों और अन्य स्थानीय निवासियों ने कंपनी के पास तरह-तरह की स्कीमों के तहत अपने पैसे जमा करवाए। अगस्त 2013 में कंपनी ने कांगड़ा स्थित अपने ऑफिस को बंद कर दिया।

न ऑफिस स्टाफ  का वेतन दिया और न ही कार्यालय के बकाया किराये का भुगतान किया। प्रार्थियों को भी उनके पैसे का भुगतान नहीं किया गया। इस बाबत पुलिस में शिकायत भी की गई। लेकिन आश्वासन के बावजूद भी आज तक इनके पैसे का भुगतान नहीं किया गया। 
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प्रार्थियों ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि राज्य सरकार को इस कंपनी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने के आदेश जारी करे। कंपनी की चल व अचल संपत्ति को तब तक जब्त करने के आदेश जारी किए जाएं, जब तक उनके पैसे नहीं मिल जाते। साथ ही राज्य सरकार को आदेश दिए जाएं कि इस तरह की कंपनियों को प्रदेश में आने की स्वीकृति न दे। मामले पर सुनवाई अब 5 अप्रैल को होगी।

कर्मचारियों के शोषण पर सरकार से जवाबतलबी

हिमाचल प्रदेश सरकार
मुफ्त एंबुलेंस में कर्मचारियों के शोषण के आरोप पर हुई शिकायत पर केंद्र ने राज्य सरकार से जवाबतलबी की है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना को पत्र लिखकर मामले की जांच कर जल्द तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजने को कहा है। 

राष्ट्रपति कार्यालय के हस्तक्षेप पर स्वास्थ्य मंत्रालय हरकत में आया है। 108 और 102 एंबुलेंस सेवा के जिला मंडी में तैनात कर्मचारियों ने राष्ट्रपति कार्यालय को शिकायत की थी। मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक कैप्टन कपिल चौधरी ने प्रधान सचिव स्वास्थ्य को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि उन्हें राष्ट्रपति कार्यालय से पत्र मिला है।

राष्ट्रपति कार्यालय में कर्मचारियों की शिकायत में आरोप हैं कि वे 108 और 102 नेशनल एंबुलेंस और जननी सुरक्षा योजना में बतौर ईएमटी और पायलट तैनात हैं। उनसे जबरन 24 से 72 घंटे तक और कई जगह महीने-महीने तक काम लिया जा रहा है। जो वेतन राज्य सरकार की ओर से एमओयू साइन करते हुए तय किया गया था, वह नहीं दिया जा रहा है। 

अगर कोई कर्मचारी अपने खिलाफ हो रहे अत्याचार और शोषण के खिलाफ आवाज उठाता है तो झूठे आरोप लगाकर उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता है या कहीं दूर स्थानांतरित किया जाता है। 

प्रदेश 108 अनुबंध कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष पूर्ण चंद ने कहा कि इस बारे में राष्ट्रपति कार्यालय को शिकायत की गई है। सरकार के प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना ने कहा कि केंद्र सरकार का यह पत्र उनके ध्यान में आते ही पूरे प्रकरण की छानबीन की जाएगी।
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लग्जरी गाड़ी चोर गिरोह के सरगना की तलाश करेगी सीआईडी

प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने चोरी की गाड़ियों को मंडी में फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेचने के मामले की जांच सीआईडी को सौंपने के निर्देश दिए हैं। दूसरे राज्यों से लग्जरी गाड़ियों को चोरी कर फर्जी दस्तावेजों पर बेचने वाले गिरोह के सरगना और उनके गुर्गों को पकड़ने की जिम्मेदारी सीआईडी को दी गई है। 

सीआईडी ने वीरवार को मामले में तेजतर्रार अफसरों की टीम का गठन किया। मामले का पर्दाफाश बीते दिनों मंडी पुलिस ने किया। यूपी के मेरठ, पंजाब और हरियाणा से चोरी गाड़ियों को फर्जी दस्तावेजों पर यहां बेचा गया है। मंडी के विभिन्न थानों में आधा दर्जन से अधिक एफआईआर दर्ज हैं। करीब सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। 21 गाड़ियां पुलिस ने बरामद की हैं। इनमें लग्जरी गाड़ियों की तादाद अच्छी खासी है। 

इसमें फॉरच्यूनर, टाटा सफारी और इनोवा भी शामिल हैं। ये गाड़ियां गोहर के अलावा शिमला ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय शिमला से भी पंजीकृत हुई हैं। जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों से भी पूछताछ की गई। उन्होंने तर्क दिया कि गाड़ियों के एनओसी देखने के बाद ही पंजीकरण का काम किया गया है। जांच में यह बात सामने आई है कि गाड़ी के चेसिस नंबरों के आधार पर जाली दस्तावेज बनाए गए हैं। 

मामला दूसरे राज्यों से जुड़ा होने की वजह से यह केस जिला पुलिस से लेकर स्टेट सीआईडी को सौंपा गया है। इस रैकेट के पीछे प्रदेश में और कितने लोग हैं और ऐसी कितनी गाड़ियां हिमाचल के दूसरे जिलों में ठिकाने लगाई गई हैं, इसका खुलासा सीआईडी आने वाले दिनों में करेगी। उधर, एसपी मंडी प्रेम कुमार ठाकुर ने कहा कि मामले की जांच अब सीआईडी को सौंपी है।

मंडी पुलिस ने अब तक करीब 21 गाड़ियां बरामद की हैं। छह से सात लोगों को हिरासत में लिया है। दूसरे राज्यों से लिंक होने से मामला सीआईडी को दिया है। चोरी के अलावा इसमें धोखाधड़ी की भी एफआईआर मंडी के अलग-अलग थानों में दी गई है।डीआईजी (सीआईडी) डॉ. विनोद कुमार धवन ने कहा कि इस मामले की जांच अब सीआईडी करेगी। एक स्पेशल टीम को गठन करने के निर्देश दिए गए हैं।
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