केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने पहली बार लोकसभा चुनाव में ईवीएम में नोटा बटन का विकल्प रखा। प्रदेश के मतदाताओं ने इस बटन का जमकर प्रयोग किया। प्रदेश के 28858 वोटरों ने किसी मतदाताओं को वोट नहीं किया। प्रदेश के 38 में से 24 प्रत्याशी ऐसे रहे, जिन्हें नोटा जितने वोट भी नहीं मिले।
भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार कांगड़ा में 12 प्रत्याशी मैदान में थे। इनमें नौ ऐसे प्रत्याशी रहे, जिन्हें नोटा जितने भी वोट नहीं मिले। हमीरपुर से सात, मंडी से पांच और शिमला के तीन ऐसे प्रत्याशी थे, जिन्हें अपने संसदीय क्षेत्र में नोटा जितने वोट नहीं पड़े।
यह प्रदेश और देश के लिए चौंकाने वाली तसवीर है। एक तरह से प्रदेश के 24 प्रत्याशियों के बजाय नोटा को पसंद किया है। इनमें भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और माकपा के छोड़कर अन्य सभी छोटी पार्टियां और निर्दलीय प्रत्याशी शामिल हैं। यह स्थिति चौंकाने वाली है। भविष्य में प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने से पहले कई बार सोचना पड़ेगा। इतनी संख्या में शायद ही किसी राज्य में नोटा के बटन वोटरों ने दबाया हो।
संसदीय सीट - नोटा को वोट
कांगड़ा-----------8704
मंडी-------------6067
हमीरपुर---------6473
शिमला----------7788
कुल------------28858