बैठक में निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) अपशिष्ट प्रबंधन, ठोस कचरा प्रबंधन, परिपत्र अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) एवं संसाधन पुनर्प्राप्ति, सतत पर्यटन, कचरा-मुक्त पर्यटन स्थलों के विकास, जलवायु-अनुकूल शहरी विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित परिवर्तन, डिजिटल और स्मार्ट सिटी जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश निर्माण एवं मलबे के प्रबंधन एवं पुनर्चक्रण के क्षेत्र में नॉर्वे की विशेषज्ञता, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों और उन्नत प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाएगा। प्रदेश सरकार सतत एवं पर्यावरण अनुकूल शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। इस दिशा में नॉर्वे के साथ सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार नॉर्वे के संस्थानों, विशेषज्ञों और तकनीकी साझेदारों के साथ मिलकर ऐसे व्यावहारिक मॉडल विकसित करना चाहती है, जिन्हें अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में भी अपनाया जा सके। कहा कि सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। प्रदेश ने हरित आवरण को 29.5 से बढ़ाकर 32 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और मजबूत कृषि तंत्र को बढ़ावा देने के लिए किसानों को मक्की, गेहूं, दूध और कच्ची हल्दी पर न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान किया जा रहा है। शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह, महापौर सुरेंद्र चौहान, मुख्य सचिव केके पंत, प्रधान सचिव देवेश कुमार, निदेशक शहरी विकास नीरज चड्ढा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।