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आरएल झिंटा चुने गए हपुटा अध्यक्ष

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शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के शिक्षक संगठन हपुटा के शनिवार को हुए चुनाव में प्रो. आरएल जिंटा (मनोविज्ञान विभाग) अध्यक्ष पद पर विजयी रहे। उन्होंने 82 मत हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि उनके विरोधी उम्मीदवार डा. भवानी सिंह (हिंदी) को 40 मत से संतोष करना पड़ा। महासचिव पद पर डा. राजेंद्र वर्मा (विधि विभाग) विजयी रहे हैं, उन्हें 76 मत पड़े। जबकि संदीप सेक्टू को 44 मत ही पड़े।
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दोपहर बाद घोषित चुनावी नतीजों में चुनाव अधिकारी प्रो. डीके शर्मा ने अध्यक्ष के लिए आरएल जिंटा को विजयी घोषित किया। उपाध्यक्ष पद पर एक ही नामांकन होने पर संगीत विभाग के जीत राम को निर्विरोध विजेता घोषित किया गया। महासचिव के पद पर राजेंद्र वर्मा (विधि विभाग) 32 मतों से विजयी रहे। सह सचिव के पद पर यशवंत सिंह हारटा (लाइफ लांग लर्निंग विभाग) ने कुल 86 मत प्राप्त किए। उन्होंने रत्न सिंह (आाईआईएचएस) को 53 मतों से हराकर जीत दर्ज की। संघ कार्यकारिणी के कोषाध्यक्ष के पद पर एक ही नामांकन होने पर विनय शर्मा इतिहास विभाग को निर्वाचित घोषित किया गया।
शनिवार को संघ कार्यकारिणी के तीन पदों के लिए सुबह साढ़े दस बजे से मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई जो दोपहर ढाई बजे तक चली। इसमें कुल 177 मतदाता शिक्षकों में से 122 ने ही अपने मत का प्रयोग किया। चुनाव अधिकारी प्रो.डीके शर्मा और सहायक चुनाव अधिकारी बलजिंद्र सिंह ने बताया कि चुनाव केमिस्ट्री विभाग में शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुए। हपुटा के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जोगिंद्र धीमान ने नई कार्यकारिणी को जीत की बधाई दी।
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ये चुने गए निर्विरोध कार्यकारिणी सदस्य
कार्यकारिणी के ओपन वर्ग से प्रो. एसएस चौहान,, प्रो. रघुविंद्र सिंह, डा. प्रवीण शर्मा, और डा. रूमा मेहता को, पीजी सेंटर से प्रो. अमरजीत सिंह, डा. सोमन रोहटा और इक्डोल से डा. ऊषा राणा हिंदी, डा. देव राज संस्कृत को निर्विरोध सदस्य घोषित किया गया है।

नई कार्यकारिणी की यह रहेगी प्राथमिकता
प्रो. आरएल जिंटा ने सभी शिक्षकों का आभार जताते हुए अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं। इनमें पीएचडी की शिक्षकों की रुकी इंक्रीमेंट को बहाल करवाने, शिक्षकों की पुरानी सर्विस को सेवाकाल में शामिल करने, सीएएस के तहत शिक्षकों को पदोन्नति दिलवाने, विवि में शिक्षकों की भर्ती की रुकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने, कैंपस और शिक्षक कॉलोनी की आम समस्याओं को दूर करवाने के साथ ही शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु को 65 साल किए जाने की मांग को मुख्यमंत्री और राज्यपाल के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाकर उसे पूरा करवाने का हर संभव प्रयास करने की बात कही।
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