फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महासंघ ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, जोगटा बोले-चुनाव में भुगतना पड़ेगा खामियाजा

Mon, 02 Oct 2017 09:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महासंघ ने सरकार और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर कर्मचारियों के साथ वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।
विज्ञापन


अध्यक्ष एसएस जोगटा, महासचिव गोपाल कृष्ण शर्मा और प्रेस सचिव एमआर वर्मा ने संयुक्त बयान में कहा कि मुख्यमंत्री ने सरकार बनने से पहले 2012 में पीटरहॉफ में एनजीओ सम्मेलन में 4-9-14 को 1 जनवरी, 2006 से बहाल करने का वादा किया था।

इसी तरह वित्त सचिव की अध्यक्षता में वेतन विसंगति समिति बनाने का भी वादा किया था। सरकार के पांच साल का कार्यकाल खत्म होने को है, लेकिन वादों पर कुछ भी नहीं किया गया है। कहा कि प्रदेश के कर्मचारियों के साथ सरकार ने बड़ा धोखा किया है।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने अपने वायदे नहीं पूरे किए तो विधानसभा चुनाव में कर्मचारियों की नाराजगी झेलनी पड़ेगी। कर्मचारी नेताओं ने यहां तक कहा कि जो पिछली भाजपा सरकार ने दिया, कम से कम वर्तमान सरकार को उतना तो देना चाहिए। इसके साथ ही महासंघ ने रिटायरमेंट की उम्र को भी 58 से 60 करने की मांग दोहराई है। कहा कि इससे सरकार का नुकसान नहीं, बल्कि फायदा ही होगा।

डीएलएड पर गुमराह करने का आरोप 

राजकीय सीएंडवी अध्यापक संघ ने शिक्षा विभाग पर डिप्लोमा इन एलीमेंटरी एजूकेशन कोर्स करवाने के लिए शिक्षकों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। प्रदेश अध्यक्ष चमन लाल शर्मा ने कहा कि शायद विभाग को खुद डीएलएड की पूरी जानकारी ही नहीं है कि ये कोर्स किसे करवाना है।

शर्मा ने कहा कि मानसिक रूप से परेशान सीएंडवी शिक्षक ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की इंक्वायरी सेल में मेल की कि अगर शिक्षक के पास आर्ट एंड क्राफ्ट का दो वर्ष का डिम्लोमा किया है तो क्या उसे डीएलएड करना चाहिए।

इस पर संस्थान ने इंकार किया है। कहा कि जब संस्थान डीएलएड करने की जरूरत से इंकार कर रहा है तो शिक्षा विभाग जबरन शिक्षकों पर ही यह क्यों थोप रहा है। मांग की कि सरकार चार अक्तूबर की कैबिनेट बैठक में इस पर अपने स्तर से निर्णय लेकर शिक्षकों को राहत पहुंचाने का प्रयास करे।

मांगें नहीं मानीं तो विस चुनावों का बहिष्कार : मंच

प्रदेश पीटीए शिक्षक संघर्ष मंच के पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी कर चेतावनी दी है कि अगर शिक्षकों की मांगें नहीं मानी गईं तो विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा। मंच के प्रदेशाध्यक्ष पंकज कुमार, महिला प्रकोष्ठ की राज्य अध्यक्ष छवि सूद, राज्य उपाध्यक्ष दिनेश पटियाल, महासचिव संजीव ठाकुर, मुख्य सलाहकार नरेंद्र शर्मा ने कहा कि पिछले 12 साल से दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने पीटीए अध्यापकों को वोट बैंक के लिए सिर्फ  सब्जबाग ही दिखाए।

हजारों अध्यापक परिवार दोनों दलों की राजनीतिक लड़ाई के कारण शोषण की चक्की में पिसकर रह गए हैं। उन्होंने वर्तमान सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप भी लगाया। कहा कि 5500 अनुबंध पीटीए अध्यापक लगभग पिछले 3 साल से सशर्त नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार इस वर्ग की मांगों को नजरअंदाज कर रही है। भाजपा पीटीए अध्यापकों के मुद्दे पर खामोश है। कहा कि सरकार ने 4 अक्तूबर को कैबिनेट बैठक में अनुबंध पीटीए अध्यापकों को सशर्त नियमितीकरण का निर्णय नहीं लिया तो वे चुनावों का बहिष्कार करेंगे। 

कांग्रेस के बहिष्कार का निर्णय

पर्यटन विकास निगम से सेवानिवृत्त कर्मचारियों की निगम के होटलों और रेस्तरां में जलपान और आवास पर छूट की मांग को अनदेखा करने से नाराज सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का विरोध करने की घोषणा की है।

अध्यक्ष नरेंद्र बाली, महासचिव कांता चौहान और प्रेस सचिव एसआर हरनोट ने कहा कि निगम के उपाध्यक्ष और शीर्ष अधिकारियों ने जाते-जाते होटलों/रेस्तरां में खानपान पर 50 प्रतिशत तक छूट का जुगाड़ कर लिया।

निदेशक मंडल सदस्यों ने पांच हजार के प्रिविलेज कार्ड को केवल पांच सौ रुपये में स्वीकृत करवा लिया, ताकि निगम की सेवा में न रहने पर भी आजीवन उन्हें खानपान और आवास में अच्छी छूट मिलती रहे।

इसके अतिरिक्त निगम पहले ही कई श्रेणियों को 25, 40 और पचास प्रतिशत तक छूट दे रही है।
इनमें सेवानिवृत्त कर्मचारी शामिल नहीं हैं। कहा कि सेवानिवृत्त हुए कर्मचारी लंबे अर्से से मुख्यमंत्री और निगम से इस मांग को उठाते रहे हैं लेकिन किसी ने उसे नहीं माना। 
विज्ञापन

कैबिनेट बैठक में पुरानी पेंशन पर निर्णय ले सरकार

प्रदेश एनपीए कर्मचारी महासंघ ने सरकार से 4 अक्तूबर की कैबिनेट बैठक में 80 हजार कर्मचारियों के लिए 2003 के बाद बंद की गई पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की है। महासंघ के मुख्य सलाहकार एलडी चौहान, संगठन सचिव श्याम लाल वर्मा, कुशाल भारद्वाज ने कहा कि केंद्र सरकार से ली गई आरटीआई के जवाब ने स्पष्ट कर दिया है कि पुरानी पेंशन बहाल करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला है, इसलिए इसे राज्यों सरकारों के साथ ही उठाया जाए, जबकि प्रदेश सरकार इस मामले को केंद्र का बता रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें