बिजली कानून संशोधन विधेयक 2018 के खिलाफ आठ जनवरी को देश भर में बिजली कर्मचारी धरना देंगे। इस दौरान बिजली बोर्ड के मंडल, वृत्त और मुख्य अभियंता स्तर के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किए जाएंगे। स्टेट इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड इंप्लाइज यूनियन के महासचिव हीरालाल वर्मा ने बताया कि शीत सत्र में पारित करने के लिए केंद्र सरकार संशोधन विधेयक ला रही है।
संशोधन कानून के प्रभाव में आने से बिजली बोर्ड विघटित होकर सभी कार्यों को अलग-अलग करने के साथ वितरण के कार्य को छोटी-छोटी कंपनियों में बांटा जाना तय है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की भूगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की लागत औद्योगिक क्षेत्र की तुलना में काफी ज्यादा है, जिसे अभी विद्युत दरें तय करते समय क्रॉस सब्सिडी को कम किया जा रहा है।
इस कानून के पारित होने से दूरदराज क्षेत्रों में बिजली दरें आपूर्ति के हिसाब से तय होगी। ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। बिजली मापने के लिए जगह-जगह इलेक्ट्रानिक उपकरणों व बिजली के फीडरों को अलग-अलग करने का खर्च भी उपभोक्ताओं को वहन करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि औद्योगिक व अन्य राजस्व वाले क्षेत्र निजी हाथों में चले जाएंगे। इसका सीधा असर प्रदेश के घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
जहां बड़े उपभोक्ताओं को उनकी सुविधा अनुसार बिजली मिलेगी। अन्य उपभोक्ताओं की विद्युत आपूर्ति में दी जा रही सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित होंगी और विद्युत दरें बढ़ेंगी। यूनियन के महासचिव हीरालाल वर्मा ने बताया कि बोर्ड कर्मचारियों की अन्य मांगों को लेकर भी प्रदर्शन के दौरान उठाया जाएगा।