पर्यटन कारोबारियों को डर सता रहा है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कहीं सैलानी शिमला से मुंह न मोड़ दें।
हिल्सक्वीन शिमला में समर टूरिस्ट सीजन की आज से औपचारिक शुरूआत हो गई है। मैदानों में तपती गर्मी से राहत पाने के लिए सैलानी शिमला का रुख करने को बेकरार हैं, लेकिन सरकार की सुस्ती से अब तक शिमला के लिए न तो डिमांड के मुताबिक पानी का इंतजाम हो पाया है और न ही टूरिस्टों की गाड़ियों के लिए पार्किंग की वैकल्पिक व्यवस्था।
पर्यटन कारोबारियों को डर सता रहा है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कहीं सैलानी शिमला से मुंह न मोड़ दें। शहर में पहले ही पानी की किल्लत चल रही है। नगर निगम तीसरे दिन पानी की सप्लाई दे रहा है। इन दिनों आईपीएच शहर को औसतन 32 से 35 एमएलडी पानी दे रहा है, जबकि शहर की डिमांड 42 एमएलडी है। टूरिस्ट सीजन में डिमांड बढ़ कर 48 एमएलडी हो जाएगी।
ऐसे में करीब 13 एमएलडी कम पानी से कैसे काम चलेगा यह बड़ा सवाल है। उस पर अगर शहर को पानी की सप्लाई देने वाली गिरि और गुम्मा परियोजना हांफ गई तो पर्यटन कारोबार का बंटाधार होना तय है। राजधानी शिमला में पार्किंग की समस्या भी जस की तस है।
शहर में बमुश्किल 750 गाड़ियों के लिए पार्किंग उपलब्ध है। पार्किंग की किल्लत के कारण शहर के लोगों को अपने वाहन सड़कों पर खड़े करने पड़ रहे हैं। टूरिस्ट सीजन में हर रोज औसतन 4500 टूरिस्ट वाहन शिमला पहुंचते हैं। ऐसे में यह वाहन कहां खड़े होंगे इसके लिए भी कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
आईपीएच के साथ मिलकर कर रहे संयुक्त प्रयास
शहर में पानी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आईपीएच विभाग के साथ संयुक्त प्रयास किए जा रहे हैं। शहर को जितना पानी मिलेगा उसे लोगों को बराबर बांटा जाएगा, इसके लिए नगर निगम की ओर से पुख्ता व्यवस्था की गई है।- पंकज रॉय, आयुक्त, नगर निगम, शिमला