पीजी की काउंसलिंग रद्द होने से प्रदेश के अस्पतालों में सेवाएं दे रहे इन सर्विस डॉक्टरों पर दोहरी मार पड़ रही है।
पीजी की काउंसलिंग रद्द होने से प्रदेश के अस्पतालों में सेवाएं दे रहे इन सर्विस डॉक्टरों पर दोहरी मार पड़ रही है। पहले स्नातकोत्तर में दाखिले से हाथ धोना पड़ा। अब दोबारा ज्वाइनिंग के आदेश जारी होने के बावजूद संबंधित अस्पतालों में री-ज्वाइनिंग नहीं मिल रही है।
जिन अस्पतालों से ये डॉक्टर रिलीव हुए थे, अब वहां के एसएमओ उन्हें लिखित में री-ज्वाइनिंग के ऑर्डर लाने को कह रहे हैं। इस कारण पीजी करने निकले ये डॉक्टर परेशान हैं। अप्रैल में अपने-अपने अस्पतालों से रिलीव हुए इन डॉक्टरों को री-ज्वाइनिंग के साथ वेतन की भी चिंता सताने लगी है।
चूंकि, मई माह की 6 तारीख बीत चुकी है और अस्पतालों में री-ज्वाइनिंग नहीं हो पा रही है। डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा और इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला में हर साल 120 सीटें स्नातकोत्तर के लिए भरी जाती हैं। इनमें 66 फीसदी सीटें इन सर्विस जनरल ड्यूटी ऑफिसर और 34 फीसदी सीटें डायरेक्ट कोटे से भरी जाती हैं।
नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर कुछ डॉक्टरों ने कहा कि डायरेक्ट कोटे की सीटों में अगर कोई समस्या आई है तो उसकी सजा जीडीओ को क्यों मिले। उनका कहना है कि डायरेक्ट कोटे की सीटें 34वें रैंक तक भरी जा चुकी हैं। इसके बाद की सीटों की काउंसलिंग रोक दी गई है। साथ ही जीडीओ की सारी सीटों की काउंसलिंग को रद्द करना डॉक्टरों के साथ अन्याय है। प्रदेश के दोनों मेडिकल कॉलेजों में 160 सीटें पीजी के लिए निर्धारित हैं।
काउंसलिंग के बाद डायरेक्ट कोटे की सीटों में गड़बड़ी सामने आई थी। यह छोटी समस्या थी, लेकिन जीडीओ कोटे से दो उम्मीदवार कोर्ट से ऑर्डर ले आए। दोनों को काउंसलिंग में शामिल किया गया। तभी छह और जीडीओ कोर्ट से ऑर्डर ले आए। इसके चलते पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया प्रभावित हो गई। इस कारण जीडीओ की काउंसलिंग रद्द की गई है। जीडीओ की री-ज्वाइनिंग और सैलरी की समस्या शीघ्र दूर की जाएगी।- डा. एसएस कौशल, निदेशक, मेडिकल एजूकेशन हिमाचल प्रदेश