अंग्रेजी शराब के ठेकों पर आबकारी विभाग ने लूट की खुली छूट दे रखी है। शहर के कई इलाकों में मशहूर ब्रेंड की शराब की बोतलें खुलेआम एमआरपी से अधिक कीमत पर बिक रही हैं।
शराब की कीमत और मिलावट पर किसी का चैक नहीं। कोई विरोध करता है तो जवाब मिलता है शराब लेनी है तो लो... वरना आगे का रास्ता देखो और जहां मर्जी शिकायत करो।
ठेकों पर सेल्समैन की बेबाक चुनौती से साफ है कि दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल काली है। विभाग और शराब ठेकेदारों के बीच मिलीभगत का संकेत भी मिलता है। रात को लूट खसोट ज्यादा होती है। शराब खरीदने वाले से मनमाफिक रेट वसूले जाते हैं।
लोगों से वसूले जा रहे मनमाने रेट
शहर में अंग्रेजी शराब के ठेकों पर अपने रेट हैं। विभाग की ओर से कोई भी रेट लिस्ट ठेकों के बाहर नहीं लगाई गई है। ठेके के संचालकों ने अपनी रेट लिस्ट लगा रखी है। विभाग की वेबसाइट पर अंग्रेजी शराब के रेट दिए गए हैं लेकिन बाजार में इस रेट से महंगी शराब बिक रही है।
विभाग और ठेकेदार के गठजोड़ के कारण आबकारी एवं कराधान विभाग की कार्यप्रणाली सीधे तौर पर संदेह के दायरे में है। ठेकों पर कार्रवाई के नाम पर महकमे को सांप सूंघ जाता है। शराब में मिलावट और ओवरचार्जिंग की हमेशा से शिकायतें आती रहती हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया जाता है।
मनमाफिक रेट पर शराब खरीदना मजबूरी बन गई है। हर ठेके के अपने रेट है, इसके पोस्टर ठेकों के बाहर साफ नजर आते हैं। ठेकों पर रोजाना प्रिंट रेट से अधिक पर बिक रही शराब को लेकर तीसरा ग्राहक उलझता है। आपत्ति जताने पर सेल्समैन खाने को दौड़ता है। राजधानी के ठेकों में ऐसी लूट है, तो अन्य जिलों में क्या हाल होगा।