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नीति आयोग के नए फैसले से आम आदमी पर पड़ेगी मार

Fri, 29 Apr 2016 12:18 AM IST
सुरेश शांडिल्य/अमर उजाला, शिमला
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अब सड़कों-पुलों का पैसा अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन-भत्तों के अलावा कर्ज अदायगी पर भी खर्च किया जा सकेगा।
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नीति आयोग के नए फैसले की मार अगले साल से आम आदमी पर पड़ने जा रही है। आयोग ने बजट खर्च में राज्यों के लिए प्लान और नॉन प्लान की शर्त हटाने का फैसला ले लिया है। अब सड़कों-पुलों का पैसा अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन-भत्तों के अलावा कर्ज अदायगी पर भी खर्च किया जा सकेगा।
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इसके लिए एक केंद्रीय कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी हिमाचल समेत तमाम राज्यों का पक्ष ले रही है। कर्ज में डूबे हिमाचल समेत कई राज्य भारत सरकार के इस फैसले के पक्ष में बताए जा रहे हैं। हाल ही में नई दिल्ली में हुई बैठक में नीति आयोग ने स्पष्ट किया है कि वित्त वर्ष 2017-18 से योजना और गैर योजना का ये बैरियर खत्म किया जाएगा।

आगामी वित्त वर्ष में केंद्र सरकार से पूंजीगत और राजस्व व्यय के लिए जो आर्थिक मदद आएगी, उसमें प्लान और नॉन प्लान श्रेणियां नहीं होंगी। अभी तक ये मदद पूंजीगत व्यय योजना, पूंजीगत व्यय गैर राजस्व व्यय योजना और राजस्व व्यय गैर योजना की मद से मिलती थी।
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अब इनसे योजना और गैर योजना शब्दों को हटा दिया जाएगा। यानी ये आर्थिक मदद पूंजीगत व्यय और राजस्व व्यय की मद से ही मिलेगी। वर्ष 2012 में शुरू हुई बारहवीं पंचवर्षीय योजना वर्ष 2017 में पूरी होगी। इसी के बाद नई व्यवस्था को लागू किया जाएगा।
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आम आदमी का होगा बड़ा नुकसान

सारा का सारा पैसा वेतन, भत्ते, पेंशन और ऋण अदायगी में ही खर्च हो जाएगा।
विधानसभा में पेश हुई एजी रिपोर्ट से साफ हुआ है कि किस तरह से वित्त कुप्रबंधन किया जा रहा है। योजना और गैर योजना में अंतर खत्म करने के लिए पिछले दस वर्षों से देश भर के कुछ आईएएस अधिकारियों ने अभियान चला रखा था।

इसे खत्म करने से गरीब का भारी नुकसान होगा, क्योंकि योजना का पैसा जो आम आदमी से संबंध रखता है, उसे अब अलग से नहीं दर्शाया जाएगा। सारा का सारा पैसा वेतन, भत्ते, पेंशन और ऋण अदायगी में ही खर्च हो जाएगा। अब आधारभूत ढांचे पर ज्यादा ध्यान नहीं होगा।-डॉ. एसके शाद, पूर्व योजना सलाहकार, हिमाचल प्रदेश

पैसा उतना ही मिलेगा, जो मिलना है
भारत सरकार अगले साल से प्लान और नॉन प्लान की शर्त हटा रही है। इस बारे में एक केंद्रीय कमेटी बनाई गई है। हिमाचल से पक्ष मांगा गया है। शर्त हटने का कोई खास असर नहीं होगा। पैसा उतना ही मिलेगा, जो मिलना है।-श्रीकांत बाल्दी, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त, हिमाचल सरकार
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