वे जंजैहली में एक होम स्टे में ठहरे थे। गुरुवार को शिकारी देवी के दर्शन किए और एक स्थानीय युवती, जो वहां के पैदल रास्तों की जानकार थी, के साथ गाड़ी से मंदिर पहुंचे। वापसी में जंगल के पैदल रास्ते से बूढ़ा केदार जाने का फैसला किया, लेकिन बारिश व धुंध के कारण रास्ता भटक गए। शाम 5:00 बजे होम स्टे मालिक ने राजेंद्र कुमार को फोन किया तो उन्होंने रास्ता भटकने की जानकारी दी। इसके बाद फोन आउट ऑफ रेंज हो गया।
देर शाम तक इंतजार के बाद होम स्टे संचालक ने स्थानीय लोगों और पुलिस को सूचना दी। ग्रामीण तुरंत बूढ़ा केदार की ओर खोजबीन के लिए रवाना हो गए। जंजैहली थाने से पुलिस टीम मौके पर पहुंची। एसडीआरएफ की टीम ने जंगलों में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन सफलता नहीं मिली। प्रशासन ने मंडी से क्यूआरटी भेजी। लापता राजेंद्र कुमार के मोबाइल की लोकेशन ब्रेयोगी उप तहसील छतरी की ओर दिखी, जिससे सर्च में दिक्कत आई।
रातभर ठंड और बिना आग के गुजारने के बाद सुबह छह बजे सभी बूढ़ा केदार जंगल के दूसरी ओर एक नाले में पहुंचे और गुफा में शरण ली। उनके पास मोबाइल सिग्नल नहीं था। सुबह स्थानीय लोगों ने उन्हें देखा और प्रशासन को सूचित किया। सर्च टीम तुरंत उस दिशा में रवाना हुई और सभी को सुरक्षित बचा लिया। मानसून की भारी आपदा से शिकारी देवी के जंगली रास्ते बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे धुंध में भटकने का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से जंगली मार्गों पर सावधानी बरतने और गाइड साथ लेने की अपील की है।