मिरगी के मरीजों के लिए निकोटिन घातक है। लोगों में बढ़ती धूम्रपान की लत और कई तरह की बीमारियों लेकर एक साल से किए जा रहे शोध में यह बात सामने आई है। इन्हीं को लेकर फार्माकोलॉजी डिर्पाटमेंट के प्रोफेसर एवं एचओडी ने निकोटीन इंक्रीज ऑफ फ्रीक्वेंसी ऑफ सिजर इन इपिलेपटिक पेशेंट विषय पर शोध किया। उन्होंने पाया कि मिर्गी के दौरे पड़ने वाले मरीज अगर जरूरत से ज्यादा मात्रा में निकोटीन लेता है तो यह आने वाले समय में बहुत घातक सिद्ध हो सकता है।
उन्होंने बताया कि आधुनिक युग में लोगों में सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला खाने के बढ़ते क्रेज से वह कई बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं। इस कारण उनके ब्लड में निकोटीन नामक तत्व की मात्रा बढ़ जाती है और मरीज के सीजर के प्रति प्रभाव कम हो जाता है।
निकोटीन का अधिक प्रयोग करना करता है तो उस मरीज में मिर्गी के दौरे पड़ने की फ्रीक्वेंसी भी बढ़ जाती है। प्रोफेसर ने बताया कि निकोटीन के लगातार प्रयोग के करते रहने से व्यक्ति में होठों का कैंसर, पेट और यूरिन ब्लेडर में कैंसर होने का खतरा बढ़ गया है।