नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने राजधानी शिमला स्थित होटलों को तीन महीने के भीतर अपने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के निर्देश दिए हैं।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने राजधानी शिमला स्थित होटलों को तीन महीने के भीतर अपने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को शिमला में ट्रिब्यूनल के सर्किट बेंच ने शहर में फैले पीलिया पर संज्ञान लेते हुए होटल मालिकों को नगर निगम या आईपीएच से सीवेज कनेक्टिविटी का विकल्प भी दिया। एनजीटी ने कहा कि होटलों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सीधी नजर रहेगी।
बोर्ड द्वारा हर होटल का निरीक्षण किया जाएगा। कोताही बरतने वाले होटलों की संबंधित विभागों द्वारा सीवेज की निकासी को बंद कर दिया जाएगा। एनजीटी ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निरीक्षण के लिए कमेटी भी गठित की है। ट्रिब्यूनल के चेयरमैन न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार ने पीलिया पर कड़ा संज्ञान लेते हुए कमेटी का गठन करने के आदेश जारी किए।
कमेटी में सचिव शहरी विकास, नगर निगम शिमला के आयुक्त, एनआईटी हमीरपुर के प्रोफेसर, इंजीनियर कालेज चंडीगढ़ के प्रोफेसर, सदस्य सचिव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, आईपीएच विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मनोनीत अधिकारी को कमेटी का सदस्य बनाया गया है। कमेटी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का व्यक्तिगत तौर पर निरीक्षण करेगी।
सैंपल जांच के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रयोगशाला में भेजे जाएंगे। ट्रिब्यूनल को प्रदेश महाधिवक्ता ने बताया कि इस मामले को लेकर हाईकोर्ट पहले ही स्वत संज्ञान ले चुका है। मामले के लिए जिम्मेवार अफसरों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही अमल में लाई जा रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि हम केवल एनजीटी एक्ट के प्रावधानों में रह कर यह आदेश पारित कर रहे हैं।
एनजीटी ने सभी प्रतिवादियों को याचिका का जवाब दायर करने के आदेश भी पारित किए। एनजीटी ने शिमला में सीवेज की पाइपों को एसटीपी से जोड़ा गया है या नहीं। इसको लेकर भी कमेटी से रिपोर्ट तलब की है।