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अवैध बगीचे काटने पर रोक लगाने से एनजीटी का इंकार

Wed, 16 Mar 2016 09:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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एनजीटी से उम्मीद लगाए बैठे अवैध कब्जाधारकों को तगड़ा झटका लगा है।
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हिमाचल में सरकारी वन भूमि पर अवैध रूप से सेब के बगीचे उगाकर कब्जा करने वालों को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने किसी भी तरह से राहत देने से इंकार कर दिया है। एनजीटी ने प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से पारित आदेशों में किसी भी दखल से मना करते हुए एक ट्रस्ट की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है।
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इससे एनजीटी से उम्मीद लगाए बैठे अवैध कब्जाधारकों को तगड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट के आदेशों पर छह माह में अवैध कब्जे छुड़ाने ही होंगे। छह अप्रैल 2015 को हिमाचल हाईकोर्ट ने सरकारी वन भूमि को खाली कर इस पर उगाए सेब बगीचों को छह माह के भीतर खाली करने के आदेश पारित किए थे।
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हर महीने वनरक्षकों को देनी होगी रिपोर्ट

हाईकोर्ट के आदेशों पर छह माह में अवैध कब्जे छुड़ाने ही होंगे।
एनजीटी ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया है कि एनिमल एंड वडर्स चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से दायर मामला वास्तव में हाईकोर्ट के पारित आदेशों से संबंधित है। इस पर हस्तक्षेप करना एनजीटी के क्षेत्राधिकार में नहीं है।

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव, प्रधान सचिव वन और सचिव राजस्व को आदेश दिए हैं कि वह जंगलों को काटकर उगाए गए बगीचों को तुरंत काट कर उसे अपने कब्जे में लें। अवैध फसलों और पौधों को काटने का खर्चा भी कब्जाधारियों से वसूलने के आदेश दिए गए हैं।

प्रदेश के सभी वन रक्षकों को हिदायत दी गई है कि हर महीने वह अपने अपने इलाकों के कब्जों का विवरण डीएफओ के माध्यम से अपने मुख्य कार्यालय भेजें। अवैध कब्जे से छुड़ाई गई भूमि पर कांटेदार तार लगाई जाए।

 
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