27 अप्रैल को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अगुवाई में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में सिटी डेवलपमेंट प्लान को मंजूरी मिल चुकी थी। इसकी फाइल विधि विभाग को भेजी थी। लेकिन विभाग ने इस काम में कई दिन लगा दिए। इससे पहले कि यह लागू हो जाता, इस पर रोक लग गई।
सरकार के नए सिटी डेवलपमेंट प्लान के बाद राजधानी के कोर और ग्रीन एरिया में भवन निर्माण की तैयारी कर रहे शहरवासियों को बड़ा झटका लगा है। डेवलपमेंट प्लान पर रोक लगने से अब यह लोग निर्माण कार्य नहीं कर सकेंगे। हालांकि दो माह बाद इस मामले पर एनजीटी में सुनवाई हो सकती है। सिटी डेवलपमेंट प्लान तैयार करवाने को लेकर हर मंच पर खुद को शाबाशी देने वाली भाजपा सरकार मंत्रिमंडल की मंजूरी के बावजूद इसे अधिसूचित नहीं कर पाई। 27 अप्रैल को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अगुवाई में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्लान को मंजूरी मिल चुकी थी।
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इसके बाद मुख्यमंत्री ने भी इस पर हस्ताक्षर कर दिए। अधिसूचना जारी करने के लिए इसकी फाइल विधि विभाग को भेजी थी। लेकिन विभाग ने इस काम में कई दिन लगा दिए। इससे पहले कि यह लागू हो जाता, इस पर रोक लग गई। प्लान तैयार करने वाला टीसीपी विभाग भी अधिसूचना लटकाए जाने से निराश है। टीसीपी विभाग के सूत्रों के अनुसार यदि यह प्लान अधिसूचित हो जाता और इसकी कॉपी प्रदेश हाईकोर्ट में जमा हो जाती तो शायद इस पर रोक न लगती। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बाकी फाइलों की तरह इसकी फाइल भी कई दिन धूल फांकती रह गई।
सरकार की मंशा पर भी उठने लगे सवाल
डेवलपमेंट प्लान पर क्या एनजीटी से अनुमति ली जाएगी या नहीं, इस पर सरकार ने शुरू से ही सस्पेंस बनाए रखा। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज भी इससे जुड़े सवाल पर कई बार गोल मोल जवाब देते दिखे। मंत्री का कहना था कि एनजीटी के आदेशों में ही डेवलपमेंट प्लान का जिक्र है, उसी के तहत प्लान बनाया है। हालांकि, यह मंत्री के ही प्रयास थे जिन्होंने तीन महीने के भीतर इस प्लान को अंतिम रूप दिया। लेकिन इसे कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू करने से पहले एनजीटी को भेजना है या नहीं, इस पर टीसीपी और शहरी विकास विभाग के अफसर भी मौन रहे। इससे अब इनकी मंशा पर भी सवाल उठने लगे हैं।