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सिर्फ एक क्लिक में पढ़िए राजधानी शिमला की बड़ी खबरें

Thu, 05 Jan 2017 10:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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नए साल का आगाज पहाड़ों की रानी के लिए शानदार रहा। साल का अंतिम दिन और नई साल का पहला दिन कारोबारियों को करोड़ों रुपये का कारोबार दे गया। इसका खुलासा शिमला शहर में आने वाली सैलानियों की गाड़ियों से हुआ है। नए साल की पूर्व संध्या पर शिमला शहर में पर्यटकों की 27 हजार गाड़ियां दाखिल हुईं। इसमें से 25 हजार सैलानियों ने रिज और मालरोड पर नए साल का जश्न मनाया। 
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यह आंकड़े शिमला पुलिस ने जुटाए हैं। नववर्ष पर आने वाले हर व्यक्ति पर पुलिस की सख्त नजरों के चलते भविष्य में कई तरह की कार्रवाई के लिए पुलिस के यह आंकड़े काम आएंगे। कारोबार से लेकर टैक्स तक निर्धारण और कम कारोबार का रोना रोने वाले लोग आसानी से पकड़े जा सकेंगे। 

पुलिस प्रशासन का कहना है कि मौजूदा समय में भी करीब 65 हजार सैलानी शिमला में मौजूद हैं। 31 दिसंबर की शाम को पर्यटकों से शिमला पैक था। हजारों गाड़ियों के आगे पार्किंग छोटी पड़ गई थीं। हर कहीं पर्यटक गाड़ी खड़ी कर रहे थे। इस वजह से शिमला जाम हो गया। पुलिस ने कमान संभाली और घंटों की मशक्कत के बाद  एक जनवरी को सुबह चार बजे तक ट्रैफिक खुलवाया। इस मुहिम में जिला पुलिस के सभी बड़े अफसर टीम के साथ सुबह तब तक डटे रहे जब तक ट्रैफिक सामान्य नहीं हो पाया। 
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सरकारी महकमों से भी लिया है आंकड़ा: एसपी 
सैलानियों ने शिमला के विभिन्न हिस्सों में नए साल का जश्न मनाया। अकेले रिज और मालरोड पर 25 सैलानियों ने नए साल का जश्न मनाया। एसपी शिमला डी डब्ल्यू नेगी ने कहा कि यह आंकड़ा विभिन्न सरकारी महकमों से लिया है। 

परवाणू से क्रॉस हुई थीं 32 हजार गाड़ियां  
पुलिस अफसर खुद पर्यटकों को गाइड कर रहे थे और साथ ही किसी तरह की परेशानी होने पर मोबाइल नंबर भी दे रहे थे। इतने सैलानियों की उम्मीद प्रशासन को भी नहीं थी। इस दौरान किसी तरह की कोई अप्रिय घटना भी नहीं हुई। पुलिस के सुरक्षा प्रबंध पुख्ता रहे। 

शिमला पुलिस की ओर से बुधवार को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक  31 दिसंबर  से एक जनवरी तक परवाणू बैरियर से 32 हजार गाड़ियां क्रास हुई।  इस दौरान शोघी बैरियर से शिमला पहुंची गाड़ियों की संख्या 27 हजार का आंकड़ा पार कर गई। 

शहर के घाटे वाले रूटों पर बंद होगी एचआरटीसी टैक्सी सेवा
नए साल पर एचआरटीसी शहर की जनता को झटका दे सकता है। निगम प्रबंधन ने शहर में घाटे वाले रूटों पर चल रही एचआरटीसी टैक्सियों को बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि रूट बंद करने से पहले जनवरी माह में एक बार फिर टैक्सियों की इनकम का रिव्यू होगा। कमाई न बढ़ी तो फरवरी से कुछ चुनिंदा रूटों पर टैक्सी सर्विस बंद कर दी जाएगी। 

शहर के बंधित और प्रतिबंधित मार्गों पर वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगो और विशेष श्रेणी यात्रियों के लिए चलाई जा रही एचआरटीसी टैक्सी सर्विस में कटौती हो सकती है। लगातार घट रही टैक्सियों की कमाई के मद्देनजर एचआरटीसी प्रबंधन कुछ रूटों पर इस सेवा बंद कर सकता है। 

शहर के कुछ टैक्सी रूट ऐसे हैं जहां टैक्सियों के संचालन पर लागत ज्यादा आ रही है जबकि कमाई बेहद कम है। इतना ही नहीं कुछ रूटाें पर तो कई बार डीजल का खर्चा भी पूरा नहीं हो पा रहा। एचआरटीसी अभी शहर के करीब 14 रूटों पर टैक्सी सेवा का संचालन कर रहा है जिन रूटों पर सवारियां अधिक हैं वहां टैंपो ट्रेवलर भी चलाए जा रहे हैं। 

इन रूटों पर संकट के बादल 
1.भराड़ी से लक्कड़ बाजार
2.न्यू शिमला से हाईकोर्ट
3.सरगीन से हाईकोर्ट
4.टूटीकंडी से सीटीओ

बंद किए जा सकते हैं कम आय वाले रूट: नेगी
शहर में चलाई जा रही टैक्सियों की आय की समीक्षा में पता चला है कि कुछ रूटों पर गाड़ियों की आय बहुत ही कम है। जनवरी में टैक्सियों की आय का एक बार फिर सर्वेक्षण होगा। जिन रूटों की आय लगातार कम आंकी जाएगी उन्हें बंद किया जा सकता है।- देवासेन नेगी, क्षेत्रीय प्रबंधक, एचआरटीसी

छुट्टियों में शहर खाली, कैसे मिलेगी टैक्सी को सवारी
स्कूलों में छुट्टियों के बाद शहर खाली है। बच्चों के रिजल्ट आने के बाद अधिकतर लोग गांवों का रुख कर चुके हैं। ऐसे में एचआरटीसी टैक्सियों की इनकम को लेकर होने वाले ट्रायल के दौरान सवारियां मिलने पर संशय है। मार्च के बाद अगर एचआरटीसी इनकम का आंकलन करने के लिए ट्रायल करता है तो सटीक नतीजे मिलने की संभावना अधिक है। 

छह महीने में बनकर तैयार होगा एमसी का आजीविका भवन
शहर का पहला वेडिंग जोन कांप्लेक्स ‘आजीविका भवन’ छह महीने में बनकर तैयार हो जाएगा। भवन के एक ब्लॉक का निर्माण कार्य इन दिनों जोरों पर चल रहा है। दूसरे ब्लॉक में निर्माण कार्य शुरू करने के लिए चट्टान तोड़ने का काम 30 फीसदी पूरा हो चुका है। नगर निगम सब्जी मंडी ग्राउंड के नीचे एचपीटीडीसी की लिफ्ट, शिव मंदिर के पास वेडिंग जोन कांप्लेक्स बना रहा है। 

तीन करोड़ की लागत से बनने वाले इस आठ मंजिला कांप्लेक्स में 222 दुकानें बनेंगी। केंद्र सरकार की ओर से चैलेंज फंड के तहत मिली वित्तीय मदद से नगर निगम कांप्लेक्स का निर्माण करवा रहा है। निर्माणकार्य इस साल जून माह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

नगर निगम के पास पंजीकृत शहर के करीब 168 रेहड़ी फड़ी वालों को भवन में बसाया जाएगा। शहर के बाजारों में विभिन्न स्थानों पर बैठने वाले 76 पंजीकृत तहबाजारियों सहित तिब्बती मार्केट और रिवोली रोड पर बैठने वाले 27 अन्य रेहड़ी फड़ी वालों को यहां बसाने की योजना है। 

जून तक बनकर तैयार होगा भवन: आयुक्त
आजीविका भवन का निर्माण कार्य जोर शोर से चल रहा है। एक ब्लॉक में चट्टान तोड़ने का काम 30 फीसदी तक पूरा हो गया है। जून तक भवन बन कर तैयार हो जाएगा। -पंकज राय आयुक्त, नगर निगम शिमला 

48 वाहनों के लिए बनेगी पार्किंग, लिफ्ट भी लगेगी
आजीविका भवन में 48 वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके अतिरिक्त आठ मंजिला भवन में एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए लिफ्ट भी लगेगी। प्रत्येक मंजिल पर शौचालय, पेयजल सुविधा तथा सौर ऊर्जा का प्रावधान होगा। 

पशुओं से खौफ खाए विवि ने परेशानी में डाल दिए आम लोग 
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में पशुओं की घुसपैठ रोकने के लिए बैरिके टिंग कर आम लोगों को परेशानी में डाल दिया है। आलम यह है कि लाखों रुपये खर्च करने से पहले यह तक नहीं सोचा कि इस बैरिकेटिंग से आम लोगों को क्या दिक्कतें होंगी।

विवि परिसर के रास्तों और अलग-अलग संस्थानों के परिसर में पक्के मजबूत लोहे के बैरिकेट्स लगा दिए हैं। इसे लगाते समय विवि प्रशासन दिव्यांगजनों, शारीरिक रूप से विकलांगता ग्रस्त छात्रों और लोगों की मुश्किल को विवि प्रशासन भूल गया। अब व्हील चेयर पर एक छात्र का विभाग तक पहुंचना आसान नहीं होगा।

विधि विभाग, डीएस, डीएस डब्लू कार्यालय और बीएड एमटीए विभाग, पत्रकारिता भूगोल और साथ बने योगा, पत्रकारिता विभाग, परिसर में बने आर्ट्स ब्लॉक डॉ. आंबेडकर भवन को जाने वाले दोनों ओर के रास्तों में लोहे से बैरिकेटिंग की गई है। इसमें एक समय में एक व्यक्ति ही मुश्किल से क्रॉस हो सकता है।

ऐसे में यदि कोई छात्र और व्यक्ति व्हील चेयर, बैसाखी के सहारे या फिर किसी अन्य तरह से विकलांगता से ग्रस्त व्यक्ति अकेला इसे क्रॉस करना चाहेगा तो नहीं कर पाएगा। यही नहीं विवि प्रशासन और निर्माण शाखा ने इन बैरिकेट्स के अलावा फ्लोर बैरिकेट्स भी लगाए हैं। कुछ जगह अभी बैरिकेट्स लगाए जाने हैं।

तर्क दिया जा रहा है, यह सब इंतजार सुरक्षा और परिसर में पशुओं को आने से रोकने के लिए किया है। फ्लोर बेरिकेट्स में फ्रेम में लोहे के मोटे पाइप लगाए हैं। इससे भी पैदल चलने वालों को परेशानी होगी। विवि सही मायने में यदि समस्या का समाधान चाहे तो, पूरे परिसर की ताराबंदी कर और दो से तीन मुख्य गेट बनाकर भी यह कार्य कर सकता था। इस पूरे प्रोजेक्ट में करीब चार से पांच लाख खर्च अब तक आ चुका है। 

हुड़दंगियों को काबू करने का है बंदोबस्त 
परिसर के हर विभाग के भवन के रास्तों में बेरिकेटिंग का मकसद पशुओं के साथ परिसर में होने वाले हुड़दंग में शामिल छात्रों को काबू करना भी एक मकसद है। रास्तों में अवरोधक लगे होने से प्रदर्शनकारी और हुड़दंगियों का मौके से फ रार होना आसान नहीं रहेगा। मुख्य सड़क से ही हुड़दंगी फरार हो सकेंगे। 

निकाला जाएगा कोई रास्ता: एक्सईएन
विवि की निर्माण शाखा के एक्सईएन अशोक कुमार राणा ने माना कि यह कमी रही है। इसका कोई विकल्प निकाल लिया जाएगा। छात्र संगठनों और डीएस की मांग के बाद ही बेरिकेट्स लगाकर परिसर में पशुओं की आवाजाही रोकने का प्रयास किया है। 

न्यायालय ने रैंप बनाना किया है अनिवार्य 
सर्वोच्च न्यायालय ने दिव्यांगों के लिए हर शिक्षण संस्थानों के साथ सरकारी कार्यालय में आने-जाने को अलग रैंप और रास्ता बनाने के निर्देश दे रखे हैं। इस पर अमल करते हुए एचपीयू ने ही प्रशासनिक भवन, कुलपति कार्यालय और इक्डोल भवन में अलग से रैंप और गेट भी बनवा रखे हैं लेकिन परिसर की बेरिकेटिंग करते समय वह यह सब भूल गया। 

ग्राम रोजगार सेवक की नौकरी को करो आवेदन
विकास खंड मशोबरा की विभिन्न पंचायतों में तीन ग्राम रोजगार सेवकों के पद भरे जाएंगे। खंड विकास अधिकारी मशोबरा ने इसके लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 23 जनवरी निर्धारित की है। ऐसे प्रार्थी जिन्होंने सेकेंड डिविजन में दसवीं पास कर रखी है और तीन महीने का कंप्यूटर डिप्लोमा कर रखा है इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।

बाइस लाख से भी नहीं सुधरी विवि के टैगोर छात्रावास की दशा  
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के टैगोर छात्रावास की रिपेयर पर करीब डेढ़ साल पहले खर्चे 22 लाख रुपये का असर हॉस्टल की हालत देखकर नजर नहीं आता। लाखों के बजट से सिर्फ एक तरफ के पांच फ्लोर के बाथरूम और शौचालय में टाइल्स ही लगी। लेकिन दूसरी तरफ के शौचालय की दशा बेहद खराब है। स्वच्छता अभियान भी यहां बेअसर नजर आता है। शौचालयों की हालत इस कदर खराब है कि कोई भी आम छात्र बीमारी की चपेट में आ सकता है। 

हॉस्टल में कहीं खिड़की नहीं है तो कहीं दरवाजा कुछ जगह तक तो रोशनदान तक की व्यवस्था नहीं है। सर्र्द मौसम में छात्रों का यहां रहना आसान काम नहीं। 148 छात्रों के ठहरने की व्यवस्था वाले इस छात्रावास में 22 लाख रुपये खर्चकर रंग रोगन तक नहीं हो पाया। अभी भी छात्रावास भवन की दशा देखकर यह नहीं लगता कि इस पर इतना बजट खर्च किया हो। छात्रावास में ड्रेन लाइन की पाइपें लटकी पड़ी हैं। खिड़कियों के शीशे टूटे हैं। 

विवि की निर्माण शाखा के अधिकारियों के मुताबिक इतने बजट में सिर्फ इतना ही काम संभव था। इसके लिए बाकायदा पूरे टेंडर कॉल किए गए। शाखा के अधिकारियों की देखरेख में ही एक ओर से टॉयलेट और बाथरूम की दशा सुधारी गई लेकिन दूसरी तरफ के शौचालयों में खिड़की दरवाजों की हालत सही नहीं हुई। निर्माण शाखा के पास बाकायदा माइनर रिपेयर मैंटेनेंस के लिए बजट प्रावधान रहता है। 

शाखा को मरम्मत के लिए वार्डन की ओर से शिकायतें दी जाती रही हैं लेकिन मरम्मत नहीं हो रही। अधिकारियों के मुताबिक डेढ़ वर्ष पूर्व 2015 में हुए मरम्मत कार्य में छात्रावास की सीवरेज लाइन को मुख्य लाइन से जोड़ने का काम भी हुआ, वहीं इससे बिजली की मरम्मत का कार्य भी निर्माण विंग ने किया। आधे भवन की मरम्मत करवाने के बाद विवि प्रशासन और निर्माण शाखा ने फिर इस भवन की ओर दोबारा नहीं देखा। अब रूसा से आई ग्रांट के पैसों से इस भवन की मरम्मत का कोई प्रस्ताव भी नहीं है। ऐसे में छात्रावास में रहने वाले छात्रों को इन्हीं खस्ताहाल एक तरफ के टॉयलेट बाथरूम को इस्तेमाल कर गुजारा करना पड़ेगा। 

बजट से इतना ही काम संभव था: एक्सईएन
विवि की निर्माण शाखा के तत्कालीन एक्सईएन और वर्तमान निर्माण डिविजन के एक्सईएन संजय शर्मा ने कहा कि 22 लाख खर्च कर शौचालयों को पूरी तरह नये सिरे से बनाया है। ग्राउंड फ्लोर में एक बिजली का मैन जंक्शन बदला और छात्रावास को सीवरेज की मुख्य लाइन से जोड़ने का कार्य करवाया है। उनका कहना है कि अगले चरण में दूसरी ओर से शौचालय बाथरूम और रंग रोगन का कार्य करवाया जा सकेगा। इसके लिए बजट मंजूर होने पर यह संभव होगा। 

मौके पर किया ये कार्य 
लाखों रुपये से पांच फ्लोर के एक तरफ के शौचालयों में टाइल्स, फिटिंग का कार्य हुआ है। दोनों ओर के बने शौचालयों को सीवरेज लाइन से जोड़ने का काम किया गया। धरातल मंजिल में बिजली के मुख्य जंक्शन को बदलने का कार्य जरूर किया है। 

अवैध रूप से चलाई जा रही दो वोल्वो बसें जब्त
विंटर टूरिस्ट सीजन के दौरान अवैध रूप से चल रही वोल्वो बसों पर शिकंजा कसने के लिए परिवहन विभाग ने मंगलवार रात विशेष अभियान चलाया। आरटीओ प्रशांत देष्टा और एआरटीओ रविंद्र कुमार शर्मा की अगुवाई में परिवहन विभाग की टीम ने शाम सात बजे से देर रात साढ़े बारह बजे तक शहर में जगह-जगह नाके लगा कर वाहनों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अवैध रूप से चलाई जा रही दो वॉल्वो बसें भी जब्त की गईं। इसके अतिरिक्त 53 अन्य वाहनों के चालन कर करीब 50 हजार रुपये जुर्माना भी वसूला गया। 

पेयजल किल्लत से जूझ रहे हजारों लोगों को मिलेगी राहत 
राजधानी शिमला में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए अब डिमांड के आधार पर सेक्टर लेवल पर पानी के स्टोरेज टैंक बनेंगे। शहर में पांच जगह स्टोरेज टैंक बनाए जाएंगे। इसके लिए जगह का चयन कर लिया है। नगर निगम के अमृत मिशन के तहत यह काम किया जा रहा है।

शहर के हजारों लोगों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है। शिमला शहर के कुछ हिस्सों में अभी भी रोज पानी नहीं आता। यही नहीं कुछ जगह अभी भी दो या तीन दिन बाद पानी की सप्लाई दी जा रही है। हालांकि आजकल स्कूलों में छुट्टियां चल रही हैं इस वजह से पानी की खपत कम हैै। लेकिन इसके बावजूद कुछ हिस्सों में पानी किल्लत बरकरार है। ऐसे में स्टोरेज टैंकों के बनाने से लोगों के लिए पानी की सप्लाई सही रखी जा सकती है। पानी स्टोर करने के बाद अगर पीछे से सप्लाई नहीं भी आती है तो टैंकों से आपूर्ति की जाएगी। 

नगर निगम करीब एक करोड़ 18 लाख की लागत से टैंकों का निर्माण करेगा। इन सभी टैंकों की क्षमता 5-5 लाख लीटर रहेगी। मौजूदा समय में शहर में 43 टैंक हैं जिनकी क्षमता करीब तीन करोड़ लीटर पानी स्टोर करने की है। पांच नए टैंक बनने के बाद 25 लाख लीटर अतिरिक्त पानी स्टोर किया जा सकेगा।

शहर में राज्य संग्रहालय, कैथू, संजौली रेजरवायर के पास और अन्य दो नई जगह टैंक बनाए जाएंगे। इस कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। टेंडर होते ही टैंक बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। 4 महीनों के भीतर टैंक बनकर तैयार हो जाएंगे। 

पानी की किल्लत से मिलेगी राहत: कश्यप
शहर में पांच नई जगह पानी के स्टोरेज टैंक बनाए जा रहे हैं। इससे शहर में पानी की कमी को काफी हद तक दूर किया जाएगा। इसके लिए औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। टैंक बनाने का काम आगामी 4 महीनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। -राजेश कश्यप निगम अभियंता 

आम आदमी के बस में न अंगूर रहे न ही खजूर 
राजधानी शिमला में फलों के दामों में 40 से 50 फीसदी तक उछाल आया है। शहर में काफी कम मात्रा में फलों की खेप पहुंचने और डिमांड अधिक होना फलों के रेट बढ़ने का कारण बताया जा रहा है। लोअर बाजार सब्जी मंडी में एक ओर जहां सब्जियों के दामों में गिरावट आई है वहीं फलों के भाव आसमान छू रहे हैं। अंगूर के भाव जहां डेढ़ सौ रुपये किलो है वहीं खजूर सौ रुपये प्रतिकिलो बिक रहे हैं। 

फलों के भाव आम आदमी की खरीद से बाहर हो चुके हैं। कारोबारियों का कहना है कि फलों के भाव बढ़ने से ग्राहक अब कम खरीददारी कर रहे हैं। लोग केवल जरूरत के अनुसार आधा-आधा किलो तक ही फल खरीद रहे हैं। कुछ माह पहले सेब जहां 60 से 80 रुपये प्रति किलो में मिल रहा था वहीं अब 150 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। 

कृष्णा फ्रूट एंड वेजिटेबल एसोसिएशन के प्रधान सतपाल शर्मा ने बताया कि मैदानी इलाकों से फलों की सप्लाई कम आ रही है। इस कारण फलों के दामों में उछाल आया है। साथ ही उन्होंने इन सर्दियों में फलों के रेट स्थिर रहने की आशंका भी जताई है। अंगूर के भाव प्रतिकिलो के डेढ़ सौ रुपये के आसपास चल रहे हैं। 

बाजार में पहुंचा कर्नाटक का आम
लोअर बाजार सब्जी मंडी में पिछले हफ्ते कर्नाटक का सफेदा आम पहुंच गया। इसके अलावा अन्य फलों की सप्लाई भी नासिक और पंजाब से शिमला पहुंची है। 

फलों के भाव 
अंगूर    150
आम    150
सेब    160
कीवी    150
अनार    100
खजूर    100
चीकू    80
केला    80
अनानास    90 

बैंटनी कैसल में स्थापित होगा अब शहरी संग्रहालय
प्रदेश सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में बैंटनी कैसल के अधिग्रहण का फैसला लिया है। बैंटनी कैसल में शहरी संग्रहालय स्थापित करने की योजना है, जबकि आसपास की खाली जमीन में पार्क विकसित करने का प्रस्ताव है। अधिग्रहण को लेकर हिमाचल प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ  पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (हिप्पा) शिमला ने सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट तैयार की है। जिला प्रशासन अधिग्रहण को लेकर जन सुनवाई भी आयोजित कर चुका है, जिसमें लोगों ने अपनी आपत्तियां भी रखी हैं। 

स्कैंडल प्वाइंट से कालीबाड़ी जाने वाले रास्ते में कोर मालरोड पर स्थित बैंटनी कैसल बिल्डिंग में बनने वाले संग्रहालय में शिल्प कलाकृतियां, मूर्ति कला, मॉडल्स, पांडुलिपियां और शिमला शहर से जुड़े दस्तावेज प्रदर्शित किए जाएंगे। संग्रहालय का संचालन भाषा कला एवं संस्कृति विभाग करेगा। भाषा विभाग ने ही भवन के अधिग्रहण का प्रस्ताव भी रखा था। दावा किया गया है कि संग्रहालय और पार्क बनने से शिमला शहर में कला एवं पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। 

भाजपा सरकार के समय विवादों में रही इमारत
पूर्व भाजपा सरकार के समय बैंटनी कैसल की इमारत खासी विवादों में रही थी। इस भवन में डीआईजी दक्षिण क्षेत्र का ऑफिस था, जिसे सरकार ने एकाएक खाली करवा दिया। इसके बाद भवन को लंदन के कारोबारी की ओर से 45 करोड़ में खरीदने की चर्चा हुई। बैंटनी कैसल को फाइव स्टार होटल में तबदील करने को लेकर भी कई दिनों तक चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। 

एचपीयू के यूसीबीएस कॉलेज को मिला विश्वसनीय संस्थान का दर्जा
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज (यूसीबीएस) को अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्था के सर्वे में एशिया के सबसे विश्वसनीय संस्थान के रूप में आंका है। 16 अप्रैल 2017 को बैंकाक में संस्थान को 2016 का अवार्ड दिया जाना है। संस्थान के निदेशक प्रो. एसएस नारटा ने बताया कि इससे पूर्व भी यूसीबीएस को एक संस्था ने देश के बेहतरीन बिजनेस स्कूल और संस्थानों में आंक का पुरस्कृत किया था। 

यह पहला मौका है जब पूरे एशिया में इस संस्थान को विश्वसनीय संस्थान के रूप में आंका गया है। यह विवि और यहां पढ़ने वाले छात्रों के साथ पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। यूसीबीएस में वर्तमान में नेपाल, भूटान सहित अफगानी यानि एशिया और अफ्रीकन महाद्वीप के करीब 60 विदेशी छात्रा बीबीए कोर्स करने पहुंचे हैं। 

विदेशों से लगातार इसमें प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या बढ़ रही है। यहां सेल्फ फाइनासिंग मोड से ही बीबीए और बीसीए दो कोर्स चलाए जा रहे हैं।  संस्थान के प्रमुख ने बताया कि 16 अप्रैल को बैंकाक में यह अवार्ड दिया जाना है। इसके लिए इंटरनेशनल ब्रांट कंसलटिंग कार्पोरेशन की ओर से निदेशक के नाम न्योता आया है। 

अब पैदा होते ही बन जाएगा आपके बच्चे का आधार कार्ड 
जिला के अस्पतालों में अब नवजात शिशुओं के आधार कार्ड भी बनेंगे। नवजात शिशु की अपनी अलग पहचान होगी। यह बात बुधवार को रिपन अस्पताल में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीरज मित्तल ने दी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में नवजात शिशु के पैदा होने पर आधार लिंक्ड बर्थ रजिस्ट्रेशन होगा। इसमें शिशु का आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। 

इसके लिए विशेष तौर पर एक साफ्टवेयर बनाया है जिसमें पहले बॉयोमेट्रिक मशीन की सहायता से शिशु के माता या पिता के फिंगर प्रिंटस लेकर उनके आधारकार्ड की वेरिफिकेशन होगी। साथ ही इसमें शिशु का जन्म पंजीकरण नंबर भी डाला जाएगा। साफ्टवेयर में यह सब जानकारी के साथ शिशु की फोटो भी अपलोड होगी। मौके पर ही माता-पिता को आधार कार्ड बनाने का कन्फर्मेशन मेसेज मिल जाएगा। 

लगभग 15 दिन के अंदर नवजात शिशु का आधार कार्ड बनकर घर पहुंच जाएगा। शिशु का यह कार्ड पांच साल तक मान्य रहेगा। डॉ. मित्तल ने बताया कि कार्ड बनाने की जिम्मेदारी डिलीवरी सेंटर में तैनात सर्टीफाइड आधार ऑपरेटर की होगी। इन्हें नेशनल हेल्थ मिशन के तहत बीते दिनों ट्रेनिंग दी थी। इस अवसर पर डॉ. मित्तल सहित अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रंजना राव भी मौजूद रहीं। 

आधार कार्ड बनाने के लिए 18 टेबलट बांटे
जिलाभर में 18 डिलीवरी सेंटर हैं। इसमें तैनात सभी डाटा ऑपरेटरों को नवजात शिशु का आधार कार्ड बनाने के लिए 18 टेबलेट बांटे गए। साथ ही फिंगर प्रिंट लेने के लिए एक-एक बॉयोमैट्रिक मशीन भी बांटी गई।
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