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नई तकनीकः अब बस 10 मिनट में पता चलेगी फसल की बीमारी

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आलू को जकड़ने वाले रोग के वायरस का पता अब दस मिनट के भीतर चल जाएगा। इसके अलावा दूसरी फसलों की बीमारियों का भी पता चल जाएगा। शिमला स्थित सेंट्रल पोटेटो रिसर्च इंस्टीट्यूट(सीपीआरआई) ने एक वायरस डिटेक्शन किट विकसित की है। डिप स्टिक किट को बाजार में उतारने के लिए एक कंपनी से बात चल रही है।
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फिलहाल मार्केट में वायरस का पता लगाने वाली जो किट हैं, वह इंपोर्टेड और महंगी हैं। इंस्टीट्यूट का दावा है कि यह किट किसानों को सस्ते दामों में उपलब्ध होगी। देश में टॉप-10 आलू उत्पादक राज्यों में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब, असम, कर्नाटक, हरियाणा और झारखंड शामिल हैं।

कई तरह के रोगों के चलते अमूमन 40 फीसदी तक फसल खराब हो जाती है। सिंचाई की गलत तकनीक के अलावा रोगग्रस्त बीज का रोपण इसका एक बड़ा कारण है।
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अन्य सब्जियों पर भी कारगर

डिप स्टिक किट आलू उत्पादकों के लिए बीज स्टॉक में वायरस का पता लगाने में सुविधाजनक साबित होगी। बता दें कि हिमाचल में 2014-15 में आलू का उत्पादन तकरीबन एक लाख 90 हजार टन रहा है।

डिप स्टिक टमाटर और बैंगन पर भी कारगर
डिप स्टिक किट टमाटर, बैंगन आदि सब्जियों पर भी कारगर है। इनके वायरस का भी यह बखूबी पता लगा सकती है। सैंपल पर एक केमिकल आम तौर पर न्यूक्लिक एसिड डालने के बाद रंग की तब्दीली से यह टेस्ट किया जा सकता है।

आलू में वायरस का पता लगाने के लिए एक टेस्ट के लिए तकरीबन 40 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। एक ही स्ट्रिप से सभी वायरस टेस्ट संभव नहीं, इसलिए यह महंगा है। फिलहाल एक टेस्ट स्ट्रिप से अलग-अलग पांच और संयुक्त रूप से दो वायरस का पता लगाया जा सकता है। एक स्ट्रिप के जरिये संयुक्त रूप से चार वायरस का पता लगाने पर काम अभी चल रहा है। - डॉ. जीवलता अर्जुनन, वैज्ञानिक, सीपीआरआई, शिमला
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