छात्रों को अधूरी सुविधाओं के बीच करनी होगी पढ़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन छह शैक्षणिक विभाग अब भी स्थायी भवन और बुनियादी सुविधाओं के बिना संचालित हो रहे हैं। हर साल नए विद्यार्थियों का प्रवेश हो रहा है लेकिन विभागों को स्थायी परिसर नहीं मिल पाया है। इसका सीधा असर कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, शोध गतिविधियों और विद्यार्थियों को मिलने वाली शैक्षणिक सुविधाओं पर पड़ रहा है।
विश्वविद्यालय में फोरेंसिक साइंस, समाजशास्त्र एवं सोशल वर्क, डिफेंस एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज, आर्कियोलॉजी, पॉपुलेशन स्टडीज और विजुअल आर्ट्स विभाग वर्षों से अस्थायी स्थानों से संचालित हो रहे हैं। समाजशास्त्र एवं सोशल वर्क विभाग, विधि विभाग की कक्षाओं में चल रहा है जबकि फोरेंसिक साइंस विभाग पुराने डिपो भवन में संचालित है। कई विभागों में पर्याप्त कक्षाएं, फैकल्टी कक्ष, सेमिनार हॉल और शोध के लिए जरूरी ढांचा उपलब्ध नहीं है। जगह की कमी से नियमित शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित होती रही हैं।
स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विश्वविद्यालय ने नए सत्र के लिए विभिन्न स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है। फोरेंसिक साइंस सहित संबंधित विभागों में काउंसलिंग और मेरिट सूची जारी हो चुकी है। ऐसे में नए विद्यार्थियों को एक बार फिर अस्थायी भवनों में पढ़ाई करनी पड़ेगी। विश्वविद्यालय ने पिछले वर्षों में कई नए पाठ्यक्रम शुरू किए लेकिन उनके अनुरूप आधारभूत ढांचा विकसित नहीं हो सका। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षण सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल रहा। कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि इस पर कार्य चल रहा है। विवि में कुछ नए भवन बन रहे हैं।
छात्र संगठनों ने भी जताई नाराजगी
एसएफआई परिसर इकाई अध्यक्ष मुकेश ने कहा कि विश्वविद्यालय लगातार नए पाठ्यक्रम शुरू कर रहा है, लेकिन विभागों के लिए भवन और प्रयोगशालाओं की व्यवस्था नहीं कर पा रहा। विद्यार्थी वर्षों से अस्थायी कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं और नए सत्र में भी स्थिति नहीं बदली। एबीवीपी परिसर अध्यक्ष अक्षय ने कहा कि विश्वविद्यालय को पहले आधारभूत सुविधाएं विकसित करनी चाहिए थीं। स्थायी भवन, प्रयोगशालाओं और शैक्षणिक संसाधनों के बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव नहीं है। एनएसयूआई नेता जस्सी ने कहा कि विद्यार्थियों से पूरी फीस ली जाती है, लेकिन उन्हें स्थायी कक्षाएं और आवश्यक सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो छात्र संगठन संयुक्त रूप से आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।