इससे पूर्व साल 2014-15 में बिजली दरों को बढ़ाया गया था। साल 2017-18 में चुनावी साल होने के चलते दरों में कोई इजाफा नहीं हुआ। 2018-19 में लगातार दूसरे साल भी प्रदेश में घरेलू बिजली की दरें नहीं बढ़ी थीं। ऐसे में संभावित है कि हिमाचल में इस साल बिजली महंगी हो सकती है।
राज्य बिजली बोर्ड को अपने खर्च पूरे करने के लिए साल 2019-20 में 5801.58 करोड़ राजस्व की जरूरत है। साल 2018-19 के मुकाबले बोर्ड का खर्च 512.32 करोड़ बढ़ने की संभावना है।
बीते सालों के घाटे को जोड़ लिया जाए तो बिजली बोर्ड को साल 2019-20 में 6451.52 करोड़ की जरूरत है। बोर्ड के मुताबिक बीते सालों के घाटे को पूरा करने के लिए 1062.26 करोड़ की आवश्यकता है।
इन बिंदुओं के आधार पर ही बोर्ड ने राज्य विद्युत नियामक आयोग में रिव्यू पिटीशन दायर की है। बिजली बोर्ड का खर्च बढ़ने, आय कम होने और बीते दो सालों से दरें नहीं बढ़ने की दुहाई देते हुए आर्थिक स्थिति को खराब बताया गया है।