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Shimla News: उद्घाटन के बाद बंद कर दी पार्किंग, सड़क पर ही गाड़ियां खड़ी करने को मजबूर जनता

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20 जून को मुख्यमंत्री ने किया था एसडीए परिसर कसुम्पटी की पार्किंग का उद्घाटन लेकिन वाहनों को नहीं मिल रही एंट्री
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...315 वाहनों की क्षमता वाली पार्किंग खाली, एनएच पर लग रही कतारें, लोगों के कट रहे चालान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के एसडीए परिसर कसुम्पटी में तैयार की गई बहुमंजिला पार्किंग पर उद्घाटन के बाद फिर से बंद कर दी गई है। बैरिकेडिंग कर इस पार्किंग में वाहनों को एंट्री नहीं दी जा रही है। लोग एनएच पर गाड़ियां खड़ी करने को मजबूर है। यहां इनके चालान कट रहे हैं। पार्किंग के संचालन को लेकर नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रबंधन के बीच घमासान चल रहा है। यही कारण है कि पार्किंग के संचालन को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया है। इसके चलते पार्किंग को फिलहाल बंद रखा गया है। 20 जून को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस पार्किंग का उद्घाटन किया था। करीब 28 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस पार्किंग में 315 गाड़ियां खड़ी हो सकती हैं। हालांकि, मौके पर अभी यह सुविधा नहीं मिल रही है। एनएच की ओर से पार्किंग के प्रवेशद्वार पर बैरिकेडिंग की गई है। यहां से गाड़ियां पार्किंग में नहीं जा पा रही हैं। एसडीए की ओर से बने प्रवेशद्वार के बाहर भी बैरिकेडिंग है। लोगों ने मजबूरन इसके बाहर ही गाड़ियां खड़ी कर दी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने आम जनता को इसकी सुविधा देने के निर्देश दिए थे लेकिन अभी तक हालत यह है कि इसमें वाहनों को एंट्री तक नहीं दी जा रही है। पार्किंग के बाहर एनएच पर दोनों ओर गाड़ियां खड़ी हो रही हैं। कसुम्पटी बाजार में भी अवैध पार्किंग से जाम लग रहा है।
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हक की लड़ाई में पिस रही जनता
स्मार्ट सिटी से बनाई पार्किंग के संचालन को लेकर नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रबंधन में विवाद चल रहा है। स्मार्ट सिटी प्रबंधन इसे खुद चलाने के टेंडर कर चुका है। वहीं नगर निगम का कहना है कि यह संपत्तियां निगम को मिलनी है। दूसरा इसका टेंडर भी कम रेट पर देने के आरोप है। दोनों महकमों की आपसी लड़ाई के चलते आम जनता को इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही। महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि यह पार्किंग नगर निगम को मिलनी है। निदेशक मंडल की बैठक में भी इस पर फैसला हो चुका है। उधर स्मार्ट सिटी के अधिकारी कह रहे हैं कि अभी टेंडर रद्द करने या इसके संचालन पर अंतिम फैसला नहीं लिया है।
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