हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को लेकर विधानसभा में गुरुवार को तीखी चर्चा हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार की नई भूमि अधिग्रहण नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि फोरलेन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का खर्च राज्य सरकार को ही उठाना पड़े, तो प्रदेश स्वयं सड़क बनाए और टोल भी खुद वसूले। प्रश्नकाल के दौरान विधायक पूर्ण चंद ठाकुर, भुवनेश्वर गौड़ और चंद्रशेखर की ओर से उठाए गए मुद्दों के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला-मटौर फोरलेन परियोजना में नम्होल और घुमारवीं के पास करीब 16 किलोमीटर के दो पैच के लिए भूमि अधिग्रहण का खर्च राज्य सरकार से वहन करने को कहा गया है।
उन्होंने कहा कि जब फोरलेन का निर्माण और टोल वसूली भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) करता है, तो भूमि अधिग्रहण की लागत भी उसी को वहन करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार इस शर्त पर पुनर्विचार की मांग करेगी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर यह मुद्दा प्रमुखता से उठाएगी। द्रंग से भाजपा विधायक पूर्ण चंद ठाकुर ने मंडी-कुल्लू फोरलेन निर्माण में कथित अनियमितताओं, प्रभावित परिवारों को नुकसान और उचित मुआवजा न मिलने का मुद्दा सदन में उठाया।
नुकसान की भरपाई का मामला एनएचएआई के समक्ष रखा जाएगा: विक्रमादित्य
इस पर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि फोरलेन निर्माण से हुए नुकसान की भरपाई का मामला एनएचएआई के समक्ष रखा जाएगा। साथ ही मंडी के उपायुक्त को भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने कुल्लू-मनाली क्षेत्र में टोल प्लाजा से स्थानीय लोगों को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि फोरलेन बनने के बाद टोल शुल्क के कारण स्थानीय निवासियों का मासिक खर्च पांच से दस हजार रुपये तक बढ़ गया है। कुल्लू से मनाली तक कई स्थानों पर सड़क की स्थिति खराब है और मार्ग अभी भी पूरी तरह फोरलेन नहीं बन पाया है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि किरतपुर-मनाली फोरलेन के किनारे रहने वाले स्थानीय लोगों को टोल टैक्स में राहत देने का मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा।
60 से बढ़कर 70-75 किलोमीटर हो सकती है स्पीड लिमिट
धर्मपुर के विधायक चंद्रशेखर ने किरतपुर-मनाली फोरलेन पर लागू 60 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड लिमिट को बढ़ाने की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवहन विभाग के सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। सड़क की स्थिति और सुरक्षा मानकों का आकलन करने के बाद स्पीड लिमिट को 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटा तक बढ़ाने पर विचार किया जाएगा। सरकार सड़क सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगी, लेकिन जहां संभव होगा वहां लोगों की सुविधा के लिए उचित निर्णय लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री धन कुबेर, इनके पास लगाओ प्रार्थना पत्र
प्रश्नकाल के दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से विधायक किशोरी लाल की ओर से जब कूहल निर्माण के लिए बजट देने की मांग उठाई तो उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री धन कुबेर हैं। इनके पास प्रार्थनापत्र लगाओ। बजट जारी हो जाएगा तो विभाग काम कर देगा। अगर विधायक जुगाड़ ही चाहते हैं तो जल शक्ति विभागों के अफसरों से कह दिया जाएगा कि आपके साथ बैठक कर लें। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने भी एक सवाल के सवाल में विधायक मोहन लाल ब्राक्टा को मुख्यमंत्री से बजट मांगने की सलाह दी। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट भाषण में उन्होंने विशेष प्रावधान किया है कि जिन निर्माण कार्यों का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है, उनके शेष कार्य के लिए बजट की कमी नहीं रखी जाएगी।
भाजपा विधायकों की अनुपस्थिति पर उठे सवाल
शिमला। प्रश्नकाल के दौरान कई भाजपा विधायक अनुपस्थित रहे। जबकि अपने सवालों से पहले या बाद में वे सीटों में बैठे रहे। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने नेता विपक्ष जयराम ठाकुर को संबोधित करते हुए पूछा कि अनुपस्थिति क्यों है। राजस्व विभाग से संबंधित एक सवाल भाजपा विधायक बिक्रम सिंह की ओर से लगाया गया था। जब सवाल की बारी आई तो वह सदन में मौजूद नहीं थे। इस पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कि विधायक की मांग पर 1100 पन्नों का जवाब तैयार किया गया है। कई दिन तक अधिकारी और कर्मचारी इस काम में लगे रहे। विधायक का मौजूद न होना दुखद है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा सचिवालय को व्यवस्था करनी चाहिए कि बहुत अधिक पन्नों वाले जवाब ऑनलाइन ही दिए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायकों का अनुपस्थित रहना गलत बात है।
सदन में गलत रिपोर्ट देने वाले अफसरों पर होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि बिजली के तारों से संबंधित गलत रिपोर्ट देने वाले अफसरों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। विधायक हंसराज ने मामला उठाते हुए कहा कि चुराह क्षेत्र में आज भी पेड़ों पर बिजली के तार लगे हुए हैं। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा नहीं है। विधायक को इस बाबत तथ्य दिखाने चाहिए। गलत जानकारी देने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
संयुक्त टेंडर से इलेक्ट्रिकल ठेकेदारों के हित प्रभावित नहीं होंगे: धर्माणी
पांच करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले सिविल, इलेक्ट्रिकल और हॉर्टीकल्चर कार्यों को संयुक्त निविदा के माध्यम से करवाने की व्यवस्था पर सरकार ने विधानसभा में स्थिति स्पष्ट की। तकनीकी शिक्षा एवं टीसीपी मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि नई व्यवस्था से इलेक्ट्रिकल ठेकेदारों के हित और उनसे जुड़े हिमाचली कामगारों के रोजगार पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। विद्युत कार्य पात्र इलेक्ट्रिकल एजेंसियों के माध्यम से ही करवाए जाएंगे। विधानसभा के मानसून सत्र में नियम-62 के तहत विधायक सतपाल सिंह सत्ती की ओर से उठाए गए मामले पर लोक निर्माण मंत्री की अनुपस्थिति में टीसीपी मंत्री राजेश धर्माणी ने जवाब दिया। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग ने 19 मई, 2026 को अधिसूचना जारी कर पांच करोड़ रुपये से अधिक अनुमानित लागत वाले कार्य संयुक्त निविदा के आधार पर आवंटित करने का प्रावधान किया है। मंत्री ने कहा कि मुख्य ठेकेदार को माइनर कंपोनेंट का कार्य स्वयं करना होगा या विद्युत कार्य के लिए पात्र इलेक्ट्रिकल एजेंसी को अपने साथ जोड़ना होगा। ठेकेदार को अधिकतम तीन इलेक्ट्रिकल एजेंसियों का विवरण देना होगा। बोली के समय यह जानकारी उपलब्ध न होने पर इसे निविदा स्वीकृत होने से पहले देना अनिवार्य होगा। धर्माणी ने कहा कि बड़े भवन निर्माण कार्यों में सिविल और इलेक्ट्रिकल ठेकेदारों के बीच समन्वय की कमी से देरी होती है। संयुक्त निविदा से जवाबदेही और गुणवत्ता बेहतर होगी। उन्होंने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की समग्र निविदा व्यवस्था का भी हवाला देते हुए कहा कि सरकार ठेकेदारों की चिंताओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। धर्माणी ने कहा कि इस मामले को वह लोक निर्माण मंत्री से भी बात करेंगे।