इसमें विटामिन-डी भी भरपूर मात्रा है, जो हड्डियों को मजबूत बनाती है। इसका सेवन अन्य मशरूम की तरह भोजन के लिए किया जा सकता है। डीएमआर सोलन के निदेशक वीपी शर्मा ने बताया कि जल्द ही इस मशरूम को किसानों के उत्पादन के लिए मार्केट में उतारा जाएगा।
वैज्ञानिक सतीश ने बताया कि इस मशरूम को लकड़ी के बुरादे में उगाया जाता है। ब्लॉक बनाने के बाद इसमें मशरूम का बीज डाला जाता है और इसे 18 से 20 डिग्री तापमान में रखा जाता है। थोड़ी सी ग्रोथ के बाद इसे 23 से 25 डिग्री तापमान में रखते हैं। यह मशरूम 35 से 40 दिन में तैयार हो जाती है।